Daily Voice: आरबीआई के रुख में बदलाव की उम्मीद, कैपिटल गुड्स और खपत से जुड़े शेयरों में निवेश के मौके

चिराग ने कहा कि नियर टर्म में बैंकों के क्रेडिट ग्रोथ और एनआईएम में कुछ दबाव देखने को मिल सकता है। लेकिन मध्यम अवधि के नजरिए से देखें तो इस समय भारतीय बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में पूंजी है। उनकी पास असेट क्वालिटी भी अच्छी है। आगे भारत के इकोनॉमिक अपसाइकिल में बैंकों की अच्छी भागीदारी देखने को मिलेगी। इसके अलावा इस समय बैंकिग स्टॉक के वैल्यूएशन भी अच्छे नजर आ रहे हैं

अपडेटेड Mar 16, 2023 पर 5:11 PM
फाइनेंशियल मार्केट का 19 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले चिराग का कहना है कि आरबीआई अभी रेपो रेट में 25-50 बेसिस प्वाइंट की और बढ़ोतरी कर सकता है

क्वांटम एएमसी (Quantum AMC) के सीआईओ चिराग मेहता ने भारतीय बाजार और इकोनॉमी की आगे दिशा और दशा पर एक लंबी बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने कहा कि आगे बाजार में भारी उठापटक की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ब्याज दरों में हो रही बढ़ोतरी ग्लोबल इकोनॉमी के तमाम हिस्सों पर अपना असर दिखाएगी। इसका प्रभाव इक्विटी जैसे ज्यादा जोखिम वाले असेट क्लास पर भी देखने को मिलेगा। चिराग का मानना है कि आगे हमें भारत में आ रहे विदेशी निवेश पर कुछ और दबाव देखने को मिल सकता है। क्योंकि दुनिया के तमाम दूसरे उभरते बाजार करेक्शन के बाद वैल्यूएशन के नजरिए से भारत की तुलना में ज्यादा आकर्षक नजर आ रहे है। इसके अलावा डेट जैसे इंस्ट्रूमेंट्स पर मिल रहे ज्यादा ब्याज के कारण भी भारत में विदेशी पैसे के प्रवाह पर नेगेटिव असर देखने क मिल सकता है।

जल्द ही आरबीआई के रुख में बदलाव देखने को मिल सकता है

फाइनेंशियल मार्केट का 19 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले चिराग का कहना है कि आरबीआई अभी रेपो रेट में 25-50 बेसिस प्वाइंट की और बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि चिराग का ये भी मानना है कि अब आरबीआई की ब्याज दरों में बढ़त की नीति अपने पीक पर नजर आ रही है। ऐसे में जल्द ही आरबीआई के रुख में बदलाव देखने को मिल सकता है। उसका रुख न्यूट्रल होता नजर आ सकता है।


क्या कैपिटल गुड्स और घरेलू खपत से जुड़े शेयरों में निवेश के मौके नजर आ रहे हैं?

इस सवाल पर चिराग ने कहा कि सरकारी कैपेक्स और निजी कंपनियों द्वारा क्षमता विस्तार पर होने वाले निवेश के चलते मीडियम टर्म में कैपिटल गुड्स को फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं घरेलू कंज्यूमर गुड स्पेस में बढ़ती प्रतिस्पर्धा नियर टर्म में इस सेक्टर की कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बना सकती हैं।

क्या बैंकिंग सेक्टर में अभी भी हैं निवेश के मौके?

इस सवाल का जवाब देते हुए चिराग ने कहा कि नियर टर्म में बैंकों के क्रेडिट ग्रोथ और एनआईएम में कुछ दबाव देखने को मिल सकता है। लेकिन मध्यम अवधि के नजरिए से देखें तो इस समय भारतीय बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में पूंजी है। उनकी पास असेट क्वालिटी भी अच्छी है। आगे भारत के इकोनॉमिक अपसाइकिल में बैंकों की अच्छी भागीदारी देखने को मिलेगी। इसके अलावा इस समय बैंकिग स्टॉक के वैल्यूएशन भी अच्छे नजर आ रहे हैं। ऐसे में चिराग मेहता बैंकिंग शेयरों, खास कर प्राइवेट बैंकों पर ओवरवेट हैं।

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किस सेक्टर पर आप सुपर बुलिश हैं?

चिराग ने कहा कि वो ऑटो, खासकर टू-व्हीलर सेगमेंट पर काफी बुलिश हैं। कमोडिटी की कीमतों में गिरावट के साथ ही उत्पादन लागत में आई कमी के चलते टू व्हीलर कंपनियों को प्रोडक्ट की कीमतों में बढ़ोतरी की जरूरत नहीं होगी। ऐसे में आग इनको ग्रामीण क्षेत्रों से आती मांग का फायद मिलेगा।

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