Daily Voice : चालू कैलेंडर ईयर 2023 में बाजार में अब तक 12 फीसदी की बढ़त हुई है। लेकिन, साल 2024 में सूचकांक के 10-15 फीसदी रिटर्न देने की संभावना नहीं दिख रही है। इस समय लार्ज कैप शेयर मिडकैप की तुलना में बेहतर रिस्क एडजस्टेड रिटर्न दे रहे हैं क्योंकि मिडकैप अपनी आय में हुई ग्रोथ की तुलना कही ज्यादा तेजी दिखा चुके हैं। लार्ज-कैप शेयरों में मौजूदा स्तर से 5-10 फीसदी की तेजी आ सकती है। ये बातें एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरुण लोहचब ने मनीकंट्रोल के साथ एक साक्षात्कार में कही हैं।
भारतीय इक्विटी बाजार का 18 सालों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले वरुण लोहचब दो थीम्स को लेकर बुलिश हैं। ये हैं निवेश आधारित ग्रोथ और घरेलू बचत का होने वाला निवेश। वरुण का मानना है कि भारत की जीडीपी दूसरे उभरते बाजार वाले देशों में सबसे तेजी से बढ़ती दिख रही है। दूसरी और विकसित बाजारों के 2024 में बहुत धीमी दर से बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में भारत विदेशी निवेशकों के लिए पसंदीदा निवेश डेस्टीमेशन बन कर उभर सकता है। इसके अलावा, बढ़ती घरेलू बचत को देखते हुए लगता है घरेलू बाजार में एसआईपी के जरिए होने वाले निवेश में तेजी बनी रहेगी। ये कारक भारतीय इक्विटी बाजारों को सपोर्ट करेंगे।
जेनेरिक फार्मा सेक्टर को लेकर पॉजिटिव
फार्मा सेक्टर पर बात करते हुए वरुण ने कहा कि वे यूएस जेनेरिक फार्मा सेक्टर को लेकर पॉजिटिव हैं। दवा पेटेंट की एक्सपायरी और हेल्थ केयर लागत को कम करने की जरूरत के कारण दुनिया भर में जेनेरिक दवाओं की मांग बढ़ रही है। अमेरिका की वर्तमान स्थिति पेटेंट एक्सपायरी के कारण जेनेरिक बाजार में उत्पाद बढ़ने का संकेत दे रही है, जिससे कई भारतीय फार्मा कंपनियों को लाभ हो सकता है।
इसके अलावा कोविड के बाद इन्वेंट्री के सामान्य होने के साथ ही अमेरिकी जेनेरिक बाजार में कीमत में गिरावट की तेजी कम हो गई है, जिससे इस सेगमेंट के आउटलुक में सुधार हुआ है। मांग की स्थिति में सुधार और कीमतों की स्थिरता जेनरिक फार्मा को आकर्षक बनती है। अगले 3-5 सालों तक जेनरिक फार्मा में तेजी बने रहने की उम्मीद है।
आईटी सेक्टर की दिशा साफ नहीं
आईटी शेयरों पर बात करते हुए वरुण ने कहा कि ऐसा लगता है कि आईटी सेक्टर अपने निचले स्तर पर पहुंच गया है। अब यहां से और गिरावट नहीं होगी। लेकिन पश्चिमी बाजारों में आईटी सेवाओं के लिए मांग का आउटलुक अभी भी अनिश्चित है। अधिकांश टियर 1 आईटी कंपनियों ने अपने पूरे साल के आउटलुकको कम कर दिया है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2024 के ईपीएस अनुमान में भी मामूली कटौती देखी गई है। इसके अलावा, आईटी कंपनियों की ऑर्डर बुक और उनकी कमाई के बीच अंतर से संकेत मिलता है इन कंपनियों के ग्राहकों अपने तय आईटी खर्च को स्थगित किया गया है। इसके अलावा, अमेरिका की रियल जीडीपी ग्रोथ 2023 की 1.9 फीसदी की तुलना में 2024 में घटकर 1.0 फीसदी होने की उम्मीद है।
आईटी सेक्टर में अगले 12-18 महीनों तक ऐसी ही स्थिति बनी रहने की उम्मीद है। ऐसे में इस सेक्टर में कमाई बढ़ने की उम्मीद कम है। इसलिए, इस सेक्टर में कोई बड़ा निवेश करने से पहले डिमांड आउटलुक में स्पष्टता आने का इंतजार कर लेना चाहिए।
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