Daily Voice: ओमनीसाइंस के अश्विनी शामी की राय, दिसंबर में दरों में कटौती की संभावना पूरी तरह से नहीं की जा सकती खारिज

Daily Voice: अक्टूबर में महंगाई दर में सबसे ज्यादा उछाल खाने-पीने की चीजों की महंगाई के कारण आया है। जबकि दूसरे प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में 3-4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अश्विनी शमी ने कहा कि अगर खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर में नरमी आती है तो आरबीआई के पास ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश हो सकती है

अपडेटेड Nov 20, 2024 पर 2:41 PM
अश्विनी का मानना ​​है कि हाल ही में शिखर से करीब 15 फीसदी की गिरावट के बावजूद पारंपरिक कंज्यूमर सेक्टर का वैल्यूएशन महंगा बना हुआ है

ओमनीसाइंस कैपिटल के अश्विनी शामी का मानना ​​है कि आरबीआई की दिसंबर की प़ॉलिसी मीट में ब्याज दरों में कटौती की संभावना पूरी तरह से खारिज नहीं की जा सकती। ओमनीसाइंस के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट & पोर्टफोलियो प्रबंधक और को-फाउंडर अश्विनी शामी का मानना ​​है कि हाल में आई तेज गिरावट लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए अच्छे भाव पर मिल रहे क्वालिटी शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में जोड़ने का अच्छा मौका है।

फाइनेंशियल सर्विसेज इंडस्ट्री में 2 दशकों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले शामी ने कहा कि ब्रॉडर कंजम्पशन वाली थीम में उन्हे भुगतान और कंज्यूमर फाइनेंस जैसी फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियां निवेश के नजरिए से ज्यादा पसंद हैं।

क्विक कॉमर्स सेक्टर एक आकर्षक और हाई ग्रोथ वाला सेक्टर


अश्विनी शामी ने आगे कहा कि क्विक कॉमर्स सेक्टर एक आकर्षक और हाई ग्रोथ वाला सेक्टर क्योंकि यह पारंपरिक बिजनेस में बड़ा उथल-पुथल करने वाला । हालांकि, इस सेक्टर में निवेश करते समय वैल्यूएशन पर ध्यान देनें और अनुशासन बनाए रखने की जरूरत है। इस सेक्टर को लेकर कन्वेक्शनल बिजनेस की प्रतिक्रिया पर नजर रखनी होगी। हमें देखना होगा कि कन्वेक्शनल बिजनेस क्विक कॉमर्स के साथ सहयोगी बनता है या प्रतिस्पर्धी।

वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में सरकारी खर्च में आएगी तेजी

पिछले कई सालों से सरकारी खर्च, खास तौर पर पूंजीगत खर्च में तेज बढ़त हुई है। पिछले 10 सालों में बुनियादी ढांचे पर पूंजीगत व्यय लगभग 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इस वर्ष के लिए पूंजीगत व्यय लगभग 15 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें अनुदान सहायता भी शामिल है। सरकार के पास पहले से ही एक बड़ा खर्च योजना है और चुनावों के कारण पहली छमाही में खर्च में आई की कमी की भरपाई वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में हो जानी चाहिए।

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आय में गिरावट का अधिकांश जोखिम खत्म

अब बाजार का फोकस तीसरी तिमाही के नतीजों पर होगा। लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए वित्त वर्ष 2026 और वित्त वर्ष 2027 के अर्निंग्स आंकड़े अहम होंगे। जीडीपी ग्रोथ अनुमानों और अब चुनावों के बाद परियोजनाओं को पूरे करने पर बढ़ते फोकस को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही के नतीजों मजबूत रहने की उम्मीद है।

तेज गिरावट के बाद बाजार अहम सपोर्ट स्तर पर

बाजार पर बात करते हुए अश्विनी शामी ने कहा कि सितंबर के अंत से बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है। इस गिरावट का श्रेय वैश्विक कारकों को दिया जा सकता है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका अमेरिकी चुनाव और चीन के प्रोत्साहन पैकेज की है। बुनियादी रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 25 में वास्तविक जीडीपी ग्रोथ अनुमान लगभग 7 फीसदी है। महंगाई में भी नरमी है। ऐसे में अश्विनी शामी का मानना ​​है कि हाल में आई तेज गिरावट लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए अच्छे भाव पर मिल रहे क्वालिटी शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में जोड़ने का अच्छा मौका है।

पेमेंट और कंज्यूमर फाइनेंस कंपनियां निवेश के लिए पसंद

अश्विनी का मानना ​​है कि हाल ही में शिखर से करीब 15 फीसदी की गिरावट के बावजूद पारंपरिक कंज्यूमर सेक्टर का वैल्यूएशन महंगा बना हुआ है। निफ्टी इंडिया कंजम्पशन इंडेक्स का प्राइस टू अर्निंग्स (पी/ई) रेशियो वर्तमान में 45 है। ब्रॉडर कंजम्पशन वाली थीम में उन्हे भुगतान और कंज्यूमर फाइनेंस जैसी फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियां निवेश के नजरिए से ज्यादा पसंद हैं। कंजम्पशन के अलावा उन्हें पावर, इंफ्रा और आईटी सेक्टर पसंद है। इन सेक्टरों काफी बेहतर ग्रोथ की संभावना है। साथ इनके वैल्यूएशन भी अच्छे लग रहे हैं।

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