Daily Voice: हम फर्मा सेक्टर की ऐसी कंपनियों पर बुलिश हैं जो इस समय अच्छे वैल्यूएशन पर मिल रही हैं। इसमें CDMO सेगमेंट की कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां फर्मा सेक्टर की कंपनियों को रिसर्च और डेवलपमेंट के स्तर पर अपनी सेवाएं उपलब्ध कराकर उनको अपना सपोर्ट देती है। इसके अलावा फर्मा कंपनियों के उत्पादन, फॉर्मूलेशन और प्रोडक्ट की फिनिशिंग में भी इन कंपनियों का अहम योगदान होता है। ये बातें राइट होराइजन्स पीएमएस के अनिल रेगो ने मनीकंट्रोल के साथ हुई एक बातचीत में कही हैं।
अनिल रेगो बिल्डिंग मैटेरियल सेगमेंट से जुड़ी कंपनियों को लेकर भी बुलिश
फर्मा सेक्टर के अलावा अनिल रेगो बिल्डिंग मैटेरियल सेगमेंट से जुड़ी कंपनियों को लेकर भी बुलिश हैं। उनका कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्टर, शहरीकरण, हाउसिंग और कमर्शियल रियल एस्टेट में रिकवरी के चलते आगे बिल्डिंग मटेरियल सेगमेंट में जोरदार तेजी आने की संभावना है। उन्होंने आगे कहा कि भारत में बिल्डिंग मैटेरियल सेगमेंट में पेंट्स, टाइल्स, प्लास्टिक पाइप, वुड पैनल (लकड़ी के फट्टे) बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं। अनिल का मानना है कि अगले 5 साल में इन सेक्टर की कंपनियों में 8-11 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिल सकती है। इन सेक्टर की कंपनियों को बढ़ते शहरीकरण, रियल एस्टेट मार्केट में आ रही रिकवरी और लोगों की खर्च करने की क्षमता में आ रही बढ़त का फायदा मिलेगा।
आने वाली तिमाहियों में कैसा रह सकता है इंडिया इंक का प्रदर्शन?
इस सवाल का जवाब देते हुए रेगो ने कहा कि तीसरी तिमाही में कंपनियों का प्रदर्शन मिला जुला रहा। लेकिन चौथी तिमाही में कंपनियों की आय में ग्लोबल स्थितियों में सुधार और उत्पादन लागत में आई कमी का पॉजिटिव असर देखने को मिलेगा।
अगले वित्त वर्ष कैसा रहेगा बाजार का प्रदर्शन?
इस सवाल का जवाब देते हुए अनिल ने कहा कि पीएलआई स्कीम भारत को मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके साथ ही एक्सपोर्ट बढ़ाने में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स का बड़ा योगदान रहा है। वित्त वर्ष 2024 में कैपिटल गुड्स, FMCG,फर्मास्यूटिकल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और लॉजिस्टिक्स शेयरों में क्षमता विस्तार पर निवेश बढ़ता नजर आएगा। ग्लोबल एक्सपोर्ट मार्केट में भारत का योगदान अभी सिर्फ 2 फीसदी है। जबकि ग्लोबल एक्सपोर्ट में चीन की हिस्सेदारी 15 फीसदी है। भारत सरकार इसको ध्यान में रखकर दुनिया की बड़ी इकोनॉमीज के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने पर फोकस कर रही है। इससे आगे चलकर हमें देश की एक्सपोर्ट ओरिएंटेड कंपनियों को फायदा होता नजर आएगा।
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