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इस फंड मैनेजर ने कहा दरों में कटौती बाजार की उम्मीद से भी देर में होगी, प्राइवेट बैंक कराएंगे जोरदार कमाई

राहुल ने कहा कि उन्हें लगता है कि एफआईआई की तरफ से तीन-चार महीनों तक लगातार खरीदारी बने रहने के बाद ही हम कह सकते हैं कि एफआईआई एक बार फिर से भारत को लेकर बुलिश हो गए हैं। इस समय हम सिर्फ यही कह सकते की एफआईआई की तरफ से हे रही खरीदारी बाजार के लिए अच्छी बात है। राहुल ने इस बातचीत में आगे कहा कि निवेश के नजरिए से उनको बैंक शेयर काफी अच्छे दिख रहे हैं

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड May 31, 2023 पर 4:05 PM
इस फंड मैनेजर ने कहा दरों में कटौती बाजार की उम्मीद से भी देर में होगी, प्राइवेट बैंक कराएंगे जोरदार कमाई
राहुल आईटी और मेटल सेक्टर पर अंडर वेट हैं। सप्लाई चेन में आई दिक्कतों, यूक्रेन-रूस युद्ध और चीन की इकोनॉमी के फिर से खुलने से मेटल की कीमतों में बढ़त हुई थी। लेकिन अब मेटल की कीमतों के इन स्तरों पर टिके रहने की उम्मीद नहीं है

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें तय करने वाली बॉडी, फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की नवीनतम बैठक के मिनट को पढ़ने के बाद भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस (Bharti AXA Life Insurance) के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफीसर राहुल भुस्कुटे (Rahul Bhuskute) का मानना ​​है कि उच्च ब्याज दरों का दौर अभी आगे भी कायम रहेगा। मनीकंट्रोल से हुई बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम में तस्वीर धुंधली बनी हुई है। इससे भारत भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होगा। अमेरिका के विपरीत हम भारत में पहले भी 6 फीसदी महंगाई दर के साथ रह चुके हैं। जबकि अमेरिका के लिए 5 फीसदी का महंगाई आंकड़ा एक डरावना सपना है।

उन्होंने आगे कहा “इसके अलावा, भारत में भी, कोर इन्फ्लेशन स्थिर बनी हुई है। इसलिए मुझे लगता है कि ब्याज दरें बाजार की उम्मीद से ज्यादा लंबे समय तक ऊपरी स्तरों पर बनी रहने वाली हैं।" बताते चलें कि राहुल भुस्कुटे को इक्विटी और कैपिटल मार्केट का 25 सालों से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने एक निवेश बैंकर के रूप में शुरुआत की और फिर असेट मैनेजमेंट के प्रोफेशन में आ गए।

एफआईआई बाजार की दिशा तय करने में निभाएंगे अहम भूमिका

इक्विटी मार्केट पर आपकी क्या राय है? इसके जबाव में राहुल भुस्कुटे ने कहा कि उनका मानना है कि अंतत: एक समय ऐसा आएगा जब दरों में कटौती होगी, लेकिन यह कटौती बाजार की उम्मीद की तुलना में देर से होगी। तब तक बाजार अनिश्चितता बनी रहेगी। मई में भारतीय बाजारों में थोड़ी तेजी आई। भारतीय बाजारों ने इस कैलेंडर वर्ष की शुरुआत में उभरते बाजारों की तुलना में कुछ कमजोर प्रदर्शन किया था। लेकिन अब इसमें कुछ सुधार देखने को मिल रहा। राहुल को लगता है कि आगे चलकर एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशक) निवेश बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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