Daily Voice:भारतीय बाजारों में अभी और हो सकती है गिरावट, महंगाई कर सकती है खेल बिगाड़ने का काम- सुमित कैपिटल के सौम्या सरकार

सौम्या सरकार न्यूयॉर्क स्थित एक जानी मानी इंवेस्टमेंट एडवाइजर हैं। सुमित कैपिटल की स्थापना करने के पहले सौम्या सरकार ने 1995 से 2009 की अवधि में Deutsche Bank के साथ और 1991-1995 तक Credit Suisse के साथ काम किया है.

अपडेटेड Mar 03, 2022 पर 1:18 PM
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यूएस फेड 2022-23 के बीच 7 बार अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है और बढ़ोतरी का यह क्रम मध्य मार्च से शुरु हो सकता है.

SUNIL SHANKAR MATKAR

Sumit Capital(सुमित कैपिटल) की सीईओ और पोर्टपोलियो मैनेजर सौम्या सरकार (Soumya Sarkar) को लगता है कि जब तक कमोडिटी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण आई महंगाई थमती नहीं है तब तक भारतीय इक्विटी मार्केट में गिरावट का जोखिम बना हुआ है। इसके साथ ही जब तक यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे तनाव का कोई अच्छा समाधान नहीं होता तब तक बाजार दबाव में रहेगा।

उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि यूएस फेड 2022-23 के बीच 7 बार अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है और बढ़ोतरी का यह क्रम मध्य मार्च से शुरु हो सकता है। हालांकि यूएस बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट बाजार भागीदारों के इस विश्वास को व्यक्त करता है कि यूक्रेन तनाव ग्लोबल इकोनॉमी में मंदी ला सकता है और आगे मुद्रास्फीति का दबाव थोड़ा हल्का पड़ सकता है।


गौरतलब है कि सौम्या सरकार न्यूयॉर्क स्थित एक जानी मानी इंवेस्टमेंट एडवाइजर हैं। सुमित कैपिटल की स्थापना करने के पहले सौम्या सरकार ने 1995 से 2009 की अवधि में Deutsche Bank के साथ और 1991-1995 तक Credit Suisse के साथ काम किया है।

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इस बातचीत में उन्होंने कहा कि यूक्रेन संकट के पहले ही कमोडिटी कीमतें खासकर तेल-गैस और दूसरे इंडस्ट्रियल मेटल की कीमतें अपने मल्टीईयर हाई की और पहुंच गई थीं। कीमतों में यह बढ़ोतरी पूरी दुनिया की इकोनॉमी में आई मजबूती और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों की वजह से आई थी।

यूक्रेन -रूस के बीच हालिया तनाव ने इस स्थिति को और बुरा बना दिया है। इसको देखते हुए दुनियाभर के निवेशकों में यह धारण बन गई है कि आरबीआई भी जल्द ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता नजर आ सकता है। ऐसे में हमें लगता है कि जब तक भारतीय बाजारों में कमोडिटी की कीमतों में हुई बढ़त के चलते आई महंगाई हल्की नहीं पड़ती और यूक्रेन के संकट का कोई अच्छा समाधान नहीं निकलता तब तक बाजार में गिरावट आने का जोखिम बना हुआ है।

यूक्रेन संकट के चलते रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के असर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों से ग्लोबल सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा। इस असर की मात्रा अलग -अलग रीजन पर अलग -अलग हो सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर यूरोप में देखने को मिलेगा। उसके बाद एशिया को इसकी आंच सहनी पड़ेगी। रूस के साथ अमेरिका और कनाडा का बहुत ही कम कारोबार होता है ऐसे में इन प्रतिबंधों का सबसे कम असर कनाडा और अमेरिका पर ही होगा। इसके अलावा ये दोनों देश ऑयल और गैस के साथ दूसरी बड़ी कमोडिटीज के उत्पादक हैं। ऐसे में इनकी कीमतों में बढ़ोतरी से इन देशों को फायदा होगा।

इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान जियोपॉलिटिकल तनाव और उसके चलते बाजार में आई गिरावट में वे कमोडिटी से जुड़ी कंपनियों खासकर ऑयल एंड गैस, इंडस्ट्रियल मेटल और माइनिंग से जुड़ी कंपनियों पर ओवरवेट हैं। यह थीम पहले से ही अच्छा काम कर रही है। यूक्रेन के संकट ने इनके लिए और बढ़िया माहौल बना दिया है।

इसके अलावा डिफेंस और एरोस्पेस से जुड़ी कंपनियों , ग्लोबल शिपिंग से जुड़ी कंपनियों, साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी कंपनियों पर भी नजर रखने की सलाह होगी। वर्तमान जियोपॉलिटिकल तनाव में इन सेक्टर से जुड़े स्टॉक में तेजी आती नजर आ सकती है।

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