यू एस फेड की तरफ से मार्च 2022 के बाद से ब्याज दरों में लगातार की गई बढ़ोतरी के बाद अब भारत सहित दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में कंपनियों के नतीजों पर दबाव देखने को मिल सकता है। ये बातें IIFL सिक्योरिटीज के चेयरमैन आर वेंकटरमन ने मनीकंट्रोल के साथ हुई बातचीत में कही हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऐसी स्थिति में जब कंपनियों के प्रदर्शन पर दबाव रहने की संभावना हो तब प्राइमरी मार्केट में बहुत ज्यादा सरगर्मी की संभावना काफी कम होती है। सामान्य तौर पर प्राइमरी मार्केट में उस समय ज्यादा एक्शन देखने को मिलता है। जब बाजार और इकोनॉमी दोनों में मजबूती रहती है। भारत में इस समय महंगाई की स्थिति और मौद्रिक नीतियों को लेकर अनिश्चितता है। ऐसे में हमें आईपीओ मार्केट में बहुत गहमा-गहमी की उम्मीद नहीं है।
एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा पर बुलिश नजरिया
फाइनेंशियल मार्केट का 28 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले वेंकटरामन को कर्ज देने वाली फाइनेंशियल कंपनियां पसंद हैं। दो सरकारी बैंक एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा उन्हें खास तौर पर पसंद हैं। गौरतलब है कि अदाणी के मामले में सबसे ज्यादा झटका इन्हीं दो बैंकों को लगा था।
घरेलू मार्केट पर निर्भरता वाली फार्मा कंपनियां हैं पसंद
वेंकटरमन ने फार्मा सेक्टर पर बात करते हुए कहा कि फार्मा स्टॉक अमेरिका में कीमत दबाव के कम होने की संभावना के बीच काफी तेजी से भागे हैं। इसके अलावा सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें कम होने से फार्मा सेक्टर को फायदा हुआ है। हालांकि उनका ये भी मानना है कि फार्मा कंपनियो के लिए यह राहत शॉर्ट टर्म के लिए है। अगली एक-दो तिमाहियों में अमेरिका में जेनरिक मार्केट से जुड़ी चुनौतियां एक बार इस सेक्टर को परेशान करेंगी। उन्होंने कहा कि फॉर्मा सेक्टर में वो कंपनियां ज्यादा अच्छी लग रही हैं जो भारतीय बाजार पर निर्भर हैं। अमेरिका और दूसरे एक्सपोर्ट मार्केट से जुड़ी कंपनियों के लिए आगे मुश्किलें नजर आ रही हैं।
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