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बजट वीक में किस ओर करवट लेगा शेयर बाजार; तिमाही नतीजों, PMI डेटा, US GDP समेत इन फैक्टर्स से होगा तय

नए सप्ताह में करीब 300 कंपनियां अपने तिमाही नतीजों को जारी करेंगी। पार्टिसिपेंट्स की नजर FII की गतिविधि पर भी रहेगी क्योंकि विदेशी संस्थागत खरीदार एक और सप्ताह भारतीय इक्विटी में लगातार खरीदार बने रहे। 22 जुलाई से शुरू हो रहे सप्ताह में 7 नए IPO खुल रहे हैं। बाजार 24 जुलाई को जारी होने वाले जुलाई के HSBC मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस PMI के डेटा से संकेतों की तलाश करेगा

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Jul 21, 2024 पर 3:15 PM
बजट वीक में किस ओर करवट लेगा शेयर बाजार; तिमाही नतीजों, PMI डेटा, US GDP समेत इन फैक्टर्स से होगा तय
शुक्रवार को सेंसेक्स करीब 739 अंकों की गिरावट के साथ 80,605 पर और निफ्टी50 270 अंक गिरकर 24,531 पर आ गया।

अगले सप्ताह पेश होने जा रहे केंद्रीय बजट 2024 से पहले मार्केट पार्टिसिपेंट्स सतर्क बने हुए हैं। शुक्रवार, 19 जुलाई की बिकवाली के कारण बेंचमार्क सूचकांकों में लगभग एक प्रतिशत की गिरावट आई। सप्ताह की शुरुआत से ही सूचकांक सकारात्मक बने हुए थे, जिसमें आईटी कंपनियों की तिमाही आय और अच्छे मानसून के बीच FMCG शेयरों में खरीदारी शामिल थी। हालांकि, बजट से पहले सतर्कता और माइक्रोसॉफ्ट सर्वर में गड़बड़ी के चलते विभिन्न उद्योगों में पैदा हुई बाधाओं ने शुक्रवार को मंदड़ियों को सक्रिय कर दिया। शुक्रवार को सेंसेक्स करीब 739 अंकों की गिरावट के साथ 80,605 पर और निफ्टी50 270 अंक गिरकर 24,531 पर आ गया।

सप्ताह के दौरान निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 सूचकांकों ने बेंचमार्क से कम प्रदर्शन किया। ये दोनों सूचकांक मुनाफावसूली के बीच क्रमशः 2.2 प्रतिशत और 2.9 प्रतिशत गिर गए। आने वाले सप्ताह में, सूचकांक सबसे पहले शुक्रवार और शनिवार को बाजार बंद होने के बाद घोषित रिलायंस इंडस्ट्रीज, विप्रो, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और जेएसडब्ल्यू स्टील की तिमाही आय पर प्रतिक्रिया देंगे। कुल मिलाकर, बाजार के सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है। नए सप्ताह में कौन से अहम फैक्टर्स बाजार की दिशा तय करेंगे, आइए जानते हैं...

बजट 2024

23 जुलाई को पेश होने वाले एनडीए सरकार 3.0 के पहले केंद्रीय बजट पर सभी की निगाहें रहेंगी। अधिकांश विशेषज्ञों को उम्मीद है कि यह बजट उद्योग को सपोर्ट करने वाला होगा, जिसमें सरकार राजकोषीय घाटे, विकास के लिए पूंजीगत व्यय और सामाजिक व्यय के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगी। साथ ही, जॉब क्रिएशन, मेक इन इंडिया पहल, ग्रीन एनर्जी, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वृद्धि पर फोकस किया जाएगा। इसके अलावा, घरेलू और विदेशी निवेशक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स पर सरकार के रुख पर भी नजर रखेंगे।

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