डेनियल काह्नमैन (Daniel Kahneman) एक मनोवैज्ञानिक थे। लेकिन, उन्होंने इकोनॉमिक्स को पुनर्परिभाषित किया। उनकी बुक 'थिंकिंग, फास्ट एंड स्लो' (Thinking, Fast and Slow) का इनवेस्टर्स और बिजनेस लीडर्स पर काफी असर पड़ा। डिसिजन-मेकिंग और अनिश्चितता पर किए गए वर्क के लिए 2002 में उन्हें इकोनॉमिक्स का नोबेल पुरस्कार मिला था। यह पुरस्कार उन्हें Amos Tversky के साथ दिया गया था। काह्नमैन का 27 मार्च को 90 साल की उम्र में निधन हो गया। मनीकंट्रोल की एन महालक्ष्मी से बातचीत में उन्होंने अपने वर्क, डिसीजन मेकिंग और करियर के बारे में कई बातें बताई थीं।
बुक पढ़ने से थिंकिंग प्रोसेस नहीं बदलता
अपनी बुक थिंकिंग, फास्ट एंड स्लो के बारे में उन्होंने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि इस बुक को पढ़ने के बाद कोई व्यक्ति बेहतर तरीके से सोचना शुरू कर देगा। उन्होंने खुद को इस बात का उदाहरण बताया था। उन्होंने कहा था कि मैंने इस किताब को लिखा, लेकिन इससे मुझे बहुत फायदा नहीं हुआ। किताब लिखने के बाद भी आज मैं वही व्यक्ति हूं जो पहले था। मैं उसी तरीके से सोचता हूं जैसा पहले सोचता था।
व्यक्ति के सोचने के तरीके को बदलना मुश्किल
काह्नमैन ने व्यक्ति के सोचने के तरीके के बारे में कहा था कि इसे बदलना बहुत मुश्किल है। उन्होंने कहा था, "हमने यह कई बार कहा है कि व्यक्ति के सोचने के तरीके को बदलने के मुकाबले किसी आर्गेनाइजेशन के व्यवहार और स्ट्रक्चरल थिंकिंग को बदलना आसान है।" उन्होंने कहा था कि जो लोग अलग तरीके से सोचते हैं उनके फैसले बेहतर होते हैं। कोई बुद्धिमान व्यक्ति एक तरह से लोगों की जिंदगी में होने वाली अच्छी चीजों का ज्यादा सही अंदाजा लगा लेता है।
कॉग्नेटिव रिफलेक्शन टेस्ट में 50 फीसदी स्टूडेंट्स फेल करते हैं
उन्होंने कहा था कि थिंकिंग से जुड़ा एक टेस्ट है, जिसे Cognitive Reflection कहा जाता है। हार्वर्ड में करीब 50 फीसदी स्टूडेंट्स इस टेस्ट में फेल कर जाते हैं। एक बैट और बॉल को एक साथ खरीदने पर 1.10 डॉलर कीमत आती है। बैट की कीमत बॉल के मुकाबले 1 डॉलर ज्यादा है। बॉल की कॉस्ट कितनी है? हर आदमी इस सवाल का जवाब 10 सेंट्स देता है। लेकिन, 10 सेंट्स गलत जवाब है, क्योंकि 10 सेंट्स और 1.10 डॉलर को जोड़ने पर 1.20 डॉलर आता है। यह बहुत आसान है, लेकिन ज्यादातर लोग इसमें फेल हो जाते हैं। ऐसा नहीं है कि वे इसे समझते नहीं है। प्रॉब्लम यह है कि वे जरूरत से ज्यादा कॉन्फिडेंट होते हैं।
ऑप्टिमिस्ट होना सही थिंकिंग प्रोसेस में मददगार
उन्होंने कहा था कि आम तौर पर लोग अपने सोचने के तरीके के बारे में नहीं सोचते हैं। Cognitive Reflection का संबंध साफ तौर पर उच्च शिक्षा से है। लेकिन, इसका मतलबक यह नहीं कि हायर एजुकेशन लेने वाला हर व्यक्ति अलग तरीके से सोचता है। उन्होंने कहा था कि जब आप बहुत सफल लोगों को देखते हैं तो आप पाते हैं कि वे आशावान (Optimistic) होते हैं। उन्हें लगता है कि वे ऐसे काम कर सकते हैं जिसे दूसरे लोग नामुमकिन मानते हैं। इससे यह पता चलता है कि आशावान होना और यह सोचना कि आप कुछ भी कर सकते हैं डिसिजन मेकिंग के लिहाज से अच्छा है। लेकिन, ऐसा नहीं है।
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