Defense Stocks : पुणे स्थित डिफेंस कलपुर्जे बनाने वाली कंपनी Nibe के शेयरों में शुक्रवार सुबह के कारोबार के दौरान 10 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली है। इस हफ्ते की शुरुआत में कंपनी ने ओडिशा के तट से अपने 'सूर्यास्त्र'रॉकेटों का सफल परीक्षण किया है। उसके बाद से ही इस शेयर में जोरदार तेजी आई है। 20 मई को,Nibe ने बताया कि उसने एक्सट्रा (EXTRA) और प्रिडेटर हॉक"सूर्यास्त्र रॉकेटों के फायरिंग टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इन रॉकेटों की मारक क्षमता का परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में किया गया। इनकी मारक रेंज 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर है।
पिछले तीन सत्रों में इसमें करीब 27% भागा शेयर
यह स्टॉक आज इंट्राडे में करीब 11 प्रतिशत भागा है। रॉकेट परीक्षणों की खबर सामने आने के बाद से पिछले तीन कारोबारी सत्रों में इसमें करीब 27 प्रतिशत की तेजी आई है। ये परीक्षण 18 और 19 मई को किए गए। कंपनी ने बताया कि दोनों परीक्षणों ने सभी तट टारेगट्स को बहुत ही सटीकता के साथ हासिल किया गया। इन रॉकेटों ने सिर्फ़ 1.5 मीटर और 2 मीटर का 'सर्कुलर एरर प्रोबेबल'(CEP)दर्ज किया। बता दें कि CEP किसी मिसाइल की सटीकता को मापने का एक अहम पैमाना है। इन सफल परीक्षणों ने'सूर्यास्त्र'सिस्टम की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को साबित किया है।
'सूर्यास्त्र' दुनिया के सबसे सटीक लंबी दूरी के रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम में से एक
300 किलोमीटर तक की दूरी पर 2 मीटर से कम का CEP हासिल करने की क्षमता'सूर्यास्त्र'को दुनिया के सबसे सटीक लंबी दूरी के रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम में से एक बनाती है। उम्मीद है कि यह क्षमता भारतीय सेना को कम से कम नुकसान के साथ,अहम लक्ष्यों पर सटीक हमला करने में मदद करेगी।
कंपनी को जनवरी में सेना से मिल था बड़ा ऑर्डर
Nibe, NSE पर लिस्टेड कंपनी है। इससे पहले इसको जनवरी में आपातकालीन खरीद के तहत भारतीय सेना से'सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर'और रॉकेट की सप्लाई के लिए एक पर्चेज ऑर्डर मिला था।
सूर्यास्त्र दुश्मन के इलाके में काफी अंदर तक घुसकर करेगा हमला
सूर्यास्त्र को भारत के पहले स्वदेशी,यूनिवर्सल और मल्टी-कैलिबर रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के तौर पर पेश किया गया है। इसे दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और जमीन से जमीन पर मार दुश्मन के इलाके में काफी अंदर तक घुसकर (deep-strike operations) हमले करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस सिस्टम का मकसद पारंपरिक फील्ड आर्टिलरी और भारी बैलिस्टिक मिसाइल प्लेटफॉर्म के बीच की खाई को भरना और साथ ही सशस्त्र बलों को एक लचीला,तेज़ी से जवाब देने वाला और सटीक हमला करने वाला हथियार उपलब्ध कराना है।