Bank Nifty Trend : बैंक निफ्टी 1% से ज्यादा चढ़ा, AU SFB और एक्सिस बैंक को लगे पंख, जानिए वजह

Bank Nifty Trend : RBI द्वारा ऑफ-साइकिल दर बढ़त की संभावना से इनकार करने के बाद बैंक निफ्टी में 1.2 फीसी की बढ़त देखने को मिली है। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में 2 फीसदी की तेजी आई,जिससे बैंक निफ्टी को मजबूती मिली है

अपडेटेड May 22, 2026 पर 12:06 PM
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RBI Policy Rate : बढ़ती महंगाई और करेंसी के अवमूल्यन का जोखिम बढ़ने के कारण इंडोनेशिया और फिलीपींस में ब्याज दरें बढ़ा दी गई हैं

Bank Nifty Trend : 22 मई को बैंक निफ्टी में 1% से ज्यादा की बढ़त देखने को मिल रही है। एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय रिज़र्व बैंक संकटग्रस्त रुपये को बचाने के लिए ऑफ-साइकिल (तय समय से अलग हटकर)दर बढ़त पर विचार नहीं कर रहा है। वेटेज के हिसाब से टॉप दो बेंचमार्क स्टॉक HDFC Bank और ICICI Bank में 2 फीसदी की बढ़त देखने को मिल रही है। इसके चलते बैंक निफ्टी 1.2 फीसदी ऊपर चढ़ गया है।

22 मई को सुबह 11.40 बजे के आसपास Bank Nifty 1.16 फीसदी की बढ़त के साथ 54,057 पर ट्रेड कर रहा था। इस बढ़त में एक्सिस बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक लीड कर रहे थे। CNBC-TV18 की शुक्रवार को आई एक रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच रुपये पर पड़ रहे दबाव के बावजूद,भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों में 'ऑफ-साइकिल'बढ़ोतरी पर विचार नहीं कर रहा है।

सूत्रों ने CNBC-TV18 को बताया कि RBI अभी करेंसी को बचाने के लिए ब्याज दरों को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के मूड में नहीं दिख रहा है। अभी वह अपने फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन-टारगेटिंग फ्रेमवर्क के तहत महंगाई और ग्रोथ के बीच संतुलन बनाने पर ही फोकस कर रहा है।


CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक RBI के अंदर का मौजूदा माहौल इस बात का कोई संकेत नहीं देता कि वह करेंसी में उतार-चढ़ाव को मैनेज करने के लिए ब्याज दरों को एक टूल के तौर पर इस्तेमाल करने का कोई इरादा रखता है। सूत्रों ने 18 मई को IMF के एक इवेंट में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​की टिप्पणियों का भी ज़िक्र किया,जिसमें उन्होंने कहा था कि सेंट्रल बैंक पॉलिसी से जुड़े फैसले लेते समय,सप्लाई-साइड से लगने वाले शुरुआती झटकों को नज़रअंदाज़ करेगा।

आज की यह खबर गुरुवार को ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट आने के एक दिन बाद सामने आई है जिसमें कहा गया था कि भारतीय रिज़र्व बैंक रुपये को स्थिर करने के लिए अपने सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रहा है,जिनमें ब्याज दरों में बढ़ोतरी,अधिक करेंसी स्वैप और विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाना शामिल है।

बढ़ती महंगाई और करेंसी के अवमूल्यन का जोखिम बढ़ने के कारण इंडोनेशिया और फिलीपींस में ब्याज दरें बढ़ा दी गई हैं। बताते चलें कि फरवरी के अंत में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया लगभग 6% गिर गया है। गुरुवार को यह गिरकर प्रति डॉलर 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।

पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालें तो, RBI ने 2013 में मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट में की गई एक छोटी सी बढ़ोतरी को छोड़ दें तो,रुपये को मज़बूत करने के लिए ब्याज दरों को एक मुख्य साधन के तौर पर इस्तेमाल करने से परहेज किया है। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी 5 जून को अपना अगला फैसला सुनाएगी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इंटरेस्ट रेट स्वैप मार्केट अगले तीन महीनों में RBI द्वारा दरों में कम से कम 40 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी और अगले एक साल में 100 से ज्यादा बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं।

 

 

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