डॉलर के मुकाबले रुपया 16 दिसंबर को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। यह 91 का लेवल पार कर गया। रुपये पर दबाव का असर न सिर्फ विदेशी बल्कि घरेलू इनवेस्टर्स के सेंटिमेंट पर भी पड़ रहा है। घरेलू और विदेशी इनवेस्टर्स करेंसी से जुड़े रिस्क को लेकर चिंतित हैं। घरेलू निवेशक लिक्विडिटी पर बढ़ते दबाव से भी फिक्रमंद हैं।
