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डॉलर के मुकाबले रुपया 91 के पार पहुंचा, शेयरों से मिलने वाला रिटर्न भी घट सकता है

रुपये में इस साल आई 6.6 फीसदी की गिरावट साइक्लिकल नहीं है बल्कि यह एक दशक से ज्यादा समय से चले आ रहे दबाव का नतीजा है। 2012 से अब तक रुपये की वैल्यू 90 फीसदी से ज्यादा गिरी है। स्ट्रकचरल कमजोरी का असर रुपये को संभालने की आरबीआई की ताकत पर भी पड़ा है

Market Deskअपडेटेड Dec 16, 2025 पर 3:12 PM
डॉलर के मुकाबले रुपया 91 के पार पहुंचा, शेयरों से मिलने वाला रिटर्न भी घट सकता है
इस साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के ऐलान के बाद से रुपये पर दबाव बना रहा है।

डॉलर के मुकाबले रुपया 16 दिसंबर को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। यह 91 का लेवल पार कर गया। रुपये पर दबाव का असर न सिर्फ विदेशी बल्कि घरेलू इनवेस्टर्स के सेंटिमेंट पर भी पड़ रहा है। घरेलू और विदेशी इनवेस्टर्स करेंसी से जुड़े रिस्क को लेकर चिंतित हैं। घरेलू निवेशक लिक्विडिटी पर बढ़ते दबाव से भी फिक्रमंद हैं।

इस साल 6 फीसदी से ज्यादा गिरा है रुपया

सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक, रुपये में इस साल आई 6.6 फीसदी की गिरावट साइक्लिकल नहीं है बल्कि यह एक दशक से ज्यादा ज्यादा समय से चले आ रहे दबाव का नतीजा है। 2012 से रुपये की वैल्यू 90 फीसदी से ज्यादा गिरी है। स्ट्रकचरल कमजोरी का असर रुपये को संभालने की आरबीआई की ताकत पर भी पड़ा है। अगले 12-14 महीनों में रुपया और 6-7 फीसदी गिर सकता है।

शेयरों से मिलने वाला रिटर्न भी घट सकता है 

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