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Dollar Vs Rupee : ईरान पर अमेरिकी हमले से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, रुपया 16 पैसे गिरकर 86.75 पर खुला

Dollar Vs Rupee: ब्रेंट का कारोबार 78.16 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हो रहा है जो पिछले बंद भाव 77.01 डॉलर से 1.15 डॉलर या 1.49 फीसदी अधिक है। ईरान पर अमेरिकी हमलों से कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल आया है। इसके चलते रुपया आज 16 पैसे गिरकर 86.75 पर खुला है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Jun 23, 2025 पर 10:25 AM
Dollar Vs Rupee : ईरान पर अमेरिकी हमले से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, रुपया 16 पैसे गिरकर 86.75 पर खुला
Dollar Vs Rupee: तेल आयातकों की ओर से डॉलर की मांग बढ़ने से रुपए में गिरावट आती है। फिलहाल ब्रेंट 78.16 डॉलर प्रति बैरल पर हुआ के आसपास दिख रहा है जो पिछले बंद भाव 77.01 डॉलर से 1.15 डॉलर या 1.49 फीसदी ज्यादा है

Indian rupee : 23 जून को रुपया 16 पैसे की गिरावट के साथ खुला है। वीकेंड में ईरान के परमाणु स्थलों पर अमेरिकी हमले के बाद मिडिल-ईस्ट में एक और मोर्चा खुलने की चिंता पैदा हो गई है। इससे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने के डर के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। रुपया पिछले कारोबारी सत्र में 86.59 पर बंद होने के बाद आज डॉलर के मुकाबले 86.745 के स्तर पर खुला है।

मेहता इक्विटीज लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट कमोडिटीज राहुल कलंत्री ने कहा, "भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और अमेरिकी भंडार में उम्मीद से ज्यादा कमी आने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे सप्ताह तेजी जारी रही। इजरायल और ईरान के बीच चल रही लड़ाई ने मध्य पूर्व में सप्लाई संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है। हम क्षेत्र ग्लोबल तेल निर्यात के लिए बहुत अहम है।"

22 जून की सुबह, ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष ने एक नाटकीय मोड़ ले लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी युद्धक विमानों ने ईरान के तीन परमाणु स्थलों पर बमबारी की,जिसमें फोर्डो यूरेनियम संवर्धन संयंत्र भी शामिल था। यहा तेहरान के न्यूक्लियल इंफ्रास्ट्रक्चर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और क़ोम के पास एक पहाड़ी के भीतर गहराई में बनाया गया है।

ईरान ने इस हमले का बदला लेने की कसम खाई है। बताया जाता है कि ईरान की संसद ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का समर्थन किया है। इस रूट के जरिए ही दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई होती है। बढ़ते संघर्ष के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार और में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। डॉलर इंडेक्स में भी बढ़त हुई। जिससे रुपए पर दबाव पड़ा है।

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