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Dow Jones में 2018 के बाद सबसे लंबी गिरावट जबकि नैस्डेक रिकॉर्ड हाई पर, इंडियन मार्केट्स के लिए क्या है इसका मतलब?

अमेरिकी मार्केट में नैस्डेक रिकॉर्ड हाई पर है, जबकि डाओ जोंस में पिछले 8 सत्रों से गिरावट जारी है। दोनों प्रमुख सूचकांकों में यह अलग-अलग ट्रेंड चौंकाने वाला है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि साल के अंत में फंड मैनेजर्स खास स्ट्रेटेजी अपनाते हैं, जिसका मकसद पोर्टफोलियो का रिटर्न बढ़ाना होता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 17, 2024 पर 2:10 PM
Dow Jones में 2018 के बाद सबसे लंबी गिरावट जबकि नैस्डेक रिकॉर्ड हाई पर, इंडियन मार्केट्स के लिए क्या है इसका मतलब?
2024 न सिर्फ अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए अच्छा रहा है बल्कि इंडिया में भी टेक्नोलॉजी खासकर आईटी स्टॉक्स का रिटर्न दूसरी कंपनियों के मुकाबले बेहतर रहा है।

अमेरिकी स्टॉक मार्केट्स में मजेदार स्थिति देखने को मिली है। 16 दिसंबर को डाओ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में लगातार 8वें सत्र गिरावट देखने को मिली। यह 2018 के बाद डाओ जोंस में सबसे लंबी गिरावट है। लेकिन, अमेरिकी मार्केट का प्रमुख सूचकांक नैस्डेक रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया है। नैस्डेक में टेक्नोलॉजी कंपनियां शामिल हैं। यह 1.24 फीसदी चढ़ा, जबकि एसएंडपी 500 में 0.38 फीसदी तेजी आई। इसके उलट डाओ जेंस में 0.25 फीसदी गिरावट आई।

नैस्डेक ने दिया 34 फीसदी रिटर्न

खास बात यह है कि Nasdaq में इस तेजी में AI चिप बनाने वाली कंपनी Nvidia का हाथ नहीं है। इस साल नैस्डेक में तेजी में एनवीडिया के शेयरों में आई तेजी का बड़ा हाथ रहा है। लगातार 8 सत्रों में डाओ जोंस में करीब 3 फीसदी गिरावट आई है। इसके बावजूद 2024 में इसका रिटर्न 16 फीसदी है। इसके मुकाबले इस दौरान नैस्डेक का रिटर्न 34 फीसदी रहा है। यह डाओ के मुकाबले करीब दोगुना रिटर्न है।

साल के अंत में फंड मैनेजर्स की स्ट्रेटेजी

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