NSE के अनलिस्टेड शेयरों के नाम पर फ्रॉड! ED ने मुंबई और चेन्नई में 8 जगहों पर मारे छापे

अनलिस्टेड शेयरों के नाम पर निवेशकों से कथित धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुंबई और चेन्नई में कई जगहों पर छापेमारी की है। एजेंसी ने बताया कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की गई है। आरोप है कि NSE इंडिया लिमिटेड के कथित “अनलिस्टेड” शेयर बेचकर निवेशकों के साथ ठगी की जा रही थी

अपडेटेड Mar 06, 2026 पर 9:47 AM
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ED ने 27 फरवरी को PMLA के तहत मुंबई और चेन्नई में कुल आठ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया

अनलिस्टेड शेयरों के नाम पर निवेशकों से कथित धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुंबई और चेन्नई में कई जगहों पर छापेमारी की है। एजेंसी ने बताया कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की गई है। आरोप है कि NSE इंडिया लिमिटेड के कथित “अनलिस्टेड” शेयर बेचकर निवेशकों के साथ ठगी की जा रही थी।

ED के मुताबिक, 27 फरवरी को एजेंसी की हेडक्वार्टर इन्वेस्टिगेशन यूनिट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मुंबई और चेन्नई में कुल आठ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।

किन कंपनियों पर हुई कार्रवाई

इस कार्रवाई में कई कंपनियों और उनके डायरेक्टरों को निशाने पर लिया गया। इनमें एटम कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड, ऑप्टिमस फाइनेंशियल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, बबली इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड और सुप्रीमस एंजेल जैसी संस्थाएं शामिल हैं।


जांच में जिन व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं उनमें सतीश कुमार, संजय दमानी, नीरज निसार, कृष वोहरा, मनीष सोनी और निशा कुमारी शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि ये सभी मिलकर एक ऐसे समूह का हिस्सा थे, जिसने निवेशकों को NSE के अनलिस्टेड शेयर दिलाने का झांसा देकर पैसे जुटाए।

कैसे की गई कथित धोखाधड़ी

ED के मुताबिक आरोपियों ने निवेशकों से कहा कि उनके पास NSE इंडिया लिमिटेड के शेयर हैं और वे निजी शेयर खरीद समझौतों के जरिए प्रीमियम पर इन शेयरों को ट्रांसफर कर सकते हैं।

हालांकि जांच में सामने आया कि जिन शेयरों की बिक्री की पेशकश की जा रही थी, वे वास्तव में आरोपियों के पास थे ही नहीं। चूंकि NSE इंडिया के शेयर अभी किसी स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध नहीं हैं, इसलिए इनका लेन-देन NSE या BSE जैसे प्लेटफॉर्म पर नहीं होता और न ही इन पर एक्सचेंज सेटलमेंट व्यवस्था लागू होती है।

ED का कहना है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर आरोपियों ने निवेशकों से बड़ी रकम एडवांस पेमेंट के रूप में ली।

कई खातों के जरिए घुमाया गया पैसा

जांच में यह भी सामने आया कि निवेशकों से जुटाई गई रकम कई बैंक खातों के जरिए घुमाई गई और बाद में कथित तौर पर चल-अचल संपत्तियों में निवेश कर दी गई।

छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य कई महत्वपूर्ण सबूत जब्त किए हैं, जिन्हें एजेंसी ने आपत्तिजनक सामग्री बताया है।

ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 17(1A) के तहत सतीश कुमार, संजय दमानी और जांच के दायरे में आने वाली कंपनियों से जुड़े कई बैंक और डिमैट खातों को फ्रीज कर दिया है। एजेंसी के मुताबिक इन खातों में “अपराध से अर्जित आय” के सबूत मिले हैं।

कई राज्यों से आई शिकायतें

एजेंसी के अनुसार इस कथित योजना से जुड़े मामलों में कई राज्यों के निवेशकों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं। हालांकि कुछ मामलों में स्थानीय पुलिस एजेंसियों की ओर से अभी औपचारिक FIR दर्ज नहीं की गई है। मामले की जांच जारी है।

NSE के संभावित IPO से बढ़ी मांग

यह कथित धोखाधड़ी ऐसे समय सामने आई है जब NSE इंडिया लिमिटेड के संभावित आईपीओ के चलते अनलिस्टेड मार्केट में उसके शेयरों की मांग बढ़ रही है।

NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ आशीष चौहान ने हाल ही में बताया था कि एक्सचेंज को अपने प्रस्तावित आईपीओ के लिए सेबी से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिल चुका है और आईपीओ के लिए आवेदन तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।

उन्होंने कहा था कि इस दस्तावेज को तैयार करने में तीन से चार महीने लग सकते हैं। वहीं इनकी नियामकीय समीक्षा में दो से तीन महीने और लग सकते हैं। इस हिसाब से एक्सचेंज का लक्ष्य साल के अंत तक लिस्टिंग का है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि संभावित आईपीओ के कारण अनलिस्टेड मार्केट में NSE के शेयरों की मांग बढ़ी है। हालांकि इसी माहौल का फायदा उठाकर कुछ बिचौलिए गलत तरीके से निवेशकों को गुमराह भी कर सकते हैं।

ऐसे मामलों में निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे शेयर खरीदने से पहले विक्रेता के वास्तविक स्वामित्व की जांच डिमैट रिकॉर्ड के जरिए जरूर करें और लेन-देन केवल जाने-माने डिपॉजिटरी सिस्टम के जरिए ही करें।

ED ने कहा है कि मामले की आगे की जांच जारी है और आने वाले समय में और खुलासे हो सकते हैं।

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