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Edelweiss के को-फाउंडर राशेश शाह ने बताया शेयर बाजार में सफलता का मंत्र

राशेश शाह ने कहा कि इनवेस्टर्स और आंत्रप्रेन्योर्स दोनों के लिए इमोशनल डिसिप्लिन और फाइनेंशियल स्ट्रेंथ जरूरी है। उन्होंने कहा कि निवेश में 3 से 5 साल की साइकिल के बारे में सोचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने 1989 में जब अपना करियर शुरू किया था तब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का इंडेक्स करीब 680 था। आज यह 80,000 है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Mar 07, 2026 पर 6:37 PM
Edelweiss के को-फाउंडर राशेश शाह ने बताया शेयर बाजार में सफलता का मंत्र
शाह ने इंडिया के फाइनेंशियल मार्केट को काफी करीब से आकार लेते देखा है।

लंबी अवधि के मौकों का इस्तेमाल करने के लिए छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव को बर्दाश्त करने की क्षमता होनी चाहिए। एडलवाइज ग्रुप के को-फाउंडर राशेश शाह ने यह बात कही। शाह ने इंडिया के फाइनेंशियल मार्केट को काफी करीब से आकार लेते देखा है। बतौर आंत्रप्रेन्योर उन्हें तीन दशकों का अनुभव है। मनीकंट्रोल के फिडेक्स 2026 इवेंट में उन्होंने अपने करियर और शेयर बाजार के बारे में कई दिलचस्प बातें बताईं।

शुरुआत में आंत्रप्रेन्योर बनने में नहीं थी दिलचस्पी

शाह ने कहा कि बिजनेस परिवार से आने के बावजूद उनकी दिलचस्पी आंत्रप्रेन्योर बनने में नहीं थी। उन्होंने कहा, "मेरे पिता एक एमएसएमई आंत्रप्रेन्योर थे। मैं उन्हें काफी मेहनत करते देखता था। मैं सोचता था कि मुझे कड़ी मेहनत नहीं करनी है। मैं पढ़ाई करना, अच्छी नौकरी करना और एसी केबिन में बैठना चाहता था।" लेकिन, 1990 के दशक की शुरुआत में देश में बैलेंस ऑफ पेमेंट क्राइसिस शुरू हुई। इसके बाद सरकार ने रिफॉर्म्स करना शुरू किया।

1990 के दशक की शुरुआत में देश में बड़े बदलाव

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