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T&D प्रोजेक्ट्स में बढ़ सकती है ईपीसी कंपनियों की दिलचस्पी, क्या अभी निवेश करने पर होगी कमाई?

केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ट्रेंडर अवॉर्डिंग प्रोसेस और एग्रीमेंट से जुड़ी कमियां दूर करने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। इंडिया में ट्रांसमिशन सेगमेंट पर बढ़ते फोकस को देखते हुए घरेलू ट्रांसमिशन सेगमेंट में बड़ी ईपीसी कंपनियों की दिलचस्पी दिखी है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 12, 2024 पर 4:14 PM
T&D प्रोजेक्ट्स में बढ़ सकती है ईपीसी कंपनियों की दिलचस्पी, क्या अभी निवेश करने पर होगी कमाई?
20वीं इलेक्ट्रिक पावर सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, FY27 तक पीक इलेक्ट्रिसिटी डिमांड 296 गीगावॉट (GW) पहुंच जाने की उम्मीद है।

पिछले कुछ सालों में पावर सेक्टर में ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रिब्यूशन (टीएंडडी) और सबस्टेशन की क्षमता काफी बढ़ी है। लेकिन, कई वजहों से इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) कंपनियों ने घरेलू टीएंडडी सेगमेंट से खुद को दूर रखा है। कमजोर टेंडरिंग एक्टिविटी, कड़ी प्रतिस्पर्धा, प्राइसिंग से जुड़े मसले और वर्किंग कैपिटल की ज्यादा जरूरत इसकी वजहें हो सकती हैं। पिछले तीन सालों में इंटरनेशनल ऑर्डर्स की हिस्सेदारी बढ़ी है।

इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स में ज्यादा दिलचस्पी

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक जैसी मल्टी-लैटरल एजेंसियों की फंडिंग की वजह से इंडियन ईपीसी कंपनियां इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगाई हैं। ये प्रोजेक्ट्स कमोडिटी और लेबर की बढ़ती कीमतों के असर से पूरी तरह सुरक्षित होती हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है, "FY21-FY24 के बीच घरेलू ट्रांसमिशन ऑर्डर्स की हिस्सेदारी घटी है, जबकि इंटरनेशनल ऑर्डर्स की हिस्सेदारी बढ़ी है। इससे बड़ी ईपीसी कंपनियों की ज्योग्राफिक प्रोफाइल में बदलाव आया है।"

FY27 तक पावर डिमांड 296 GW पहुंच सकती है

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