Equity Options के लिए ओटीआर का नया फ्रेमवर्क 6 अप्रैल से लागू होगा, जानिए इसका क्या असर पड़ेगा

ओटीआर से किसी ट्रेडिंग मेंबर की तरफ से प्लेस किए गए कुल ऑर्डर्स और एग्जिक्यूटेड ट्रेड्स के रेशियो का पता चलता है। ट्रेडिंग मेंबर की तरफ से प्लेस किए गए कुल ऑर्डर में मोडिफिकेशंस और कैंसिलेशंस शामिल होते हैं

अपडेटेड Apr 04, 2026 पर 4:31 PM
ओटीआर ज्यादा होने का मतलब यह है कि ट्रेडिंग मेंबर ऑर्डर ज्यादा प्लेस करता है, लेकिन एग्जिक्यूशन की संख्या काफी कम रहती है।

स्टॉक एक्सचेंज 6 अप्रैल से ऑर्डर-टू-ट्रेड रेशियो (ओटीआर) का संशोधित फ्रेमवर्क लागू करने जा रहे हैं। इससे शेयरों के ट्रेडर्स के लिए कंप्लायंस आसान हो जाएगा। खासकर उन मार्केट पार्टिसिपेंट्स को राहत मिलेगा जो हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेड करते हैं और लिक्विडी प्रोवाइडिंग स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करते हैं। ओटीआर से किसी ट्रेडिंग मेंबर की तरफ से प्लेस किए गए कुल ऑर्डर्स और एग्जिक्यूटेड ट्रेड्स के रेशियो का पता चलता है।

OTR ज्यादा होने से सिस्टम पर दबाव बढ़ता है

ट्रेडिंग मेंबर की तरफ से प्लेस किए गए कुल ऑर्डर में मोडिफिकेशंस और कैंसिलेशंस शामिल होते हैं। ओटीआर ज्यादा होने का मतलब यह है कि ट्रेडिंग मेंबर ऑर्डर ज्यादा प्लेस करता है, लेकिन एग्जिक्यूशन की संख्या काफी कम रहती है। इससे सिस्टम में बेवजह दबाव बढ़ता है। इस तरह की एक्टिविटी आम तौर पर एल्गोरिद्म या हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग से जुड़ी होती है।


ज्यादा ओटीआर पर एक्सचेंज पेनाल्टी लगाते हैं

स्टॉक एक्सचेंज मार्केट मैनिपुलेशन रोकने, सिस्टम पर दबाव कम करने और फेयर एंड ऑर्डर्ली ट्रेडिंग को बढ़ावा देने के लिए ज्यादा ओटीआर पर पेनाल्टी लगाते हैं। एनएसई ने इस बारे में 2 अप्रैल को एक सर्कुलर जारी किया। इसमें कहा गया है, "ऑप्शंस प्रीमियम के लिए लास्ट ट्रेडेड प्राइस (LTP) के ±40% या ±INR 20 की रेंज (दोनों में से जो ज्यादा होगा) के अंदर प्लेस किए गए ऑर्डर्स को उस फ्रेमवर्क के दायरे से बाहर होंगे, जिसके तहत हाई ओटीआर पर पेनाल्टी लगाई जाती है।" यह पहले की व्यवस्था के मुकाबले काफी नरम है।

पहले के मुकाबले ओटीआर के नियम आसान

पहले सभी सेगमेंट्स के लिए पेनाल्टी से छूट की सीमा के लिए लास्ट ट्रेडेड प्राइस के करीब 0.75 फीसदी के बैंड में था। इससे बड़ी संख्या में ऑर्डर्स छूट की सीमा के दायर से बाहर रहते थे, जिससे पेनाल्टी के ज्यादा मामले होते थे। हालांकि, इक्विटी फ्यूचर्स और कैश सेगमेंट के लिए प्राइस बैंड अपरिवर्तित रहेगा। इन सेगमेंट्स में एलटीपी की 0.75 फीसदी की रेंज में ऑर्डर एंटर या मोडिफाय करने ओटीआर कंप्यूटेशन से छूट जारी रहेगी।

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ऑप्शंस के लिए एग्जेम्प्शन की शर्तें हुई आसान

ऑप्शंस के लिए एग्जेम्प्शन की शर्तें आसान बनाई गई हैं। लेकिन एक्सचेंजों ने यह कनफर्म किया है कि ओटीआर फ्रेमवर्क के तहत पेनाल्टी के मौजूदा चार्जेज, एक्शंस या दूसरे मोडालिटीज अपरिवर्तित बने रहेंगे। एक दूसरे प्रमुख बदलाव के तहत एक्सचेंज ने यह स्पष्ट किया है कि मार्केट मेकिंग पर्पस के लिए डेजिग्नेटेड मार्केट मेकर्स की तरफ से प्लेस किए गए एल्गोरिद्म ऑर्डर्स ओटीआर कंप्यूटेशन के दायरे से बाहर होंगे। इससे लिक्विडिटी प्रोवाइडर्स को फायदा हो सकता है।

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