देश में K-शेप्ड रिकवरी के ऊपरी हिस्से में भी अब सुस्ती के संकेत दिखने लगे हैं। मुख्य रूप से ऐसा फार्मल सेक्टर में नई नौकिरियों के पैदा नहीं होने के चलते हो रहा है। जाने-माने इनवेस्टमेंट एक्सपर्ट और मार्सेलस इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के फाउंडर, सौरभ मुखर्जी (Saurabh Mukherjea) ने मनीकंट्रोल के साथ बातचीत में ये बातें कहीं। K-शेप्ड रिकवरी एक ऐसी स्थिति को दिखाता है जिसमें कुछ सेक्टर्स या लोगों का आर्थिक स्तर तेजी से सुधारता है, जबकि दूसरे हिस्सों की स्थिति कमजोर होती जाती है। अभी तक माना जा रहा है कि इस K-शेप्ड रिकवरी का ऊपरी हिस्सा यानी अधिक आय वाला कंज्यूमर्स वर्ग सुस्ती से अछूता है। लेकिन अब मुखर्जी का कहना है कि इस सेगमेंट में भी दबाव के संकेत दिखने लगे हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले तक ऐसा माना जा रहा था कि भारत की K-शेप्ड रिकवरी के ऊपरी हिस्से, यानि अधिक आय वाले सेगमेंट पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, अब इस सेगमेंट में भी दबाव के संकेत दिख रहे हैं, खासकर आईटी जैसे सर्विसेज सेक्टर में रोजगार की कमी से।
सौरभ मुखर्जी के मुताबिक, ऊपरी सेगमेंट में सुस्ती का मुख्य कारण है औपचारिक रोजगार में कमजोरी, खासकर आईटी सेक्टर में। इसके अलावा, पूरे बाजार में कंजम्प्शन घटता हुआ दिखाई दे रहा है। गाड़ियों की बिक्री में कमी और उपभोक्ता की ओर से गैर-जरूरी खर्चों में गिरावट भी इस ओर इशारा करते हैं।
मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने इस बदलाव के शुरुआती संकेत को पहचानते हुए करीब 8 महीने पहले तैयारी शुरू कर दी थी। उन्हें राजनीतिक स्तर पर ग्रामीण इकोनॉमी को अधिक सपोर्ट मिलने की संभावना दिखी। इसके चलते उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में गोदरेज एग्रोवेट (Godrej Agrovet) और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Tata Consumer Products) को जोड़ा है। गोदरेज एग्रोवेट में तो उन्होंने उस समय निवेश किया जब इसकी वैल्यू लगभग 20x थी, जो अब बढ़कर 30x पर पहुंच चुकी है।
मुखर्जी ने यह भी बताया कि Marcellus लंबे समय से इंफोएज (InfoEdge) का शेयरहोल्डर है, जो Zomato में एक बड़ा हिस्सा रखता है। मुखर्दी ने कहा कि Zomato ने अपने क्विक कॉमर्स के विस्तार के जरिए उन भारतीय उपभोक्ताओं को टारगेट किया है जो तेज डिलीवरी पसंद करते हैं, और यह सेवा सस्ते लेबर की वजह से संभव हुई है।
बैंकिंग सेक्टर की बात करें तो सौरभ मुखर्जी ने कहा कि जब अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है, तो सभी संस्थानों में एसेट क्वालिटी एक जैसी दिखती है, लेकिन आर्थिक सुस्ती के दौरान असली अंतर सामने आता है। उनके मुताबिक, HDFC Bank की एसेट क्वालिटी बाकी प्राइवेट बैंकों के मुकाबले मजबूत है। इसके बावजूद उनका मानना है कि Mas फाइनेंशियल मौजूदा माहौल में अच्छा प्रदर्शन करेगा क्योंकि यह छोटे-छोटे लोन में माहिर है जिनपर ब्याज दरें अधिक होती हैं।
केमिकल्स सेक्टर में डिवीज लैब्स पर फोकस
मुखर्जी ने बताया कि उनकी कंपनी ने Divi’s Laboratories में भी अपनी बड़ी हिस्सेदारी बनाए रखी है। डिवीज लैब्स के पास पास एक मजबूत प्राइसिंग पॉवर है, जिससे चलते यह चीन के साथ कॉम्पिटीशन में बना रहता है।