देश में K-शेप्ड रिकवरी के ऊपरी हिस्से में भी अब सुस्ती के संकेत दिखने लगे हैं। मुख्य रूप से ऐसा फार्मल सेक्टर में नई नौकिरियों के पैदा नहीं होने के चलते हो रहा है। जाने-माने इनवेस्टमेंट एक्सपर्ट और मार्सेलस इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के फाउंडर, सौरभ मुखर्जी (Saurabh Mukherjea) ने मनीकंट्रोल के साथ बातचीत में ये बातें कहीं। K-शेप्ड रिकवरी एक ऐसी स्थिति को दिखाता है जिसमें कुछ सेक्टर्स या लोगों का आर्थिक स्तर तेजी से सुधारता है, जबकि दूसरे हिस्सों की स्थिति कमजोर होती जाती है। अभी तक माना जा रहा है कि इस K-शेप्ड रिकवरी का ऊपरी हिस्सा यानी अधिक आय वाला कंज्यूमर्स वर्ग सुस्ती से अछूता है। लेकिन अब मुखर्जी का कहना है कि इस सेगमेंट में भी दबाव के संकेत दिखने लगे हैं।
