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देश के K-शेप्ड रिकवरी का ऊपरी हिस्सा भी पड़ रहा है धीमा, इस दिग्गज एक्सपर्ट ने जताई चिंता

K-शेप्ड रिकवरी एक ऐसी स्थिति को दिखाता है जिसमें कुछ सेक्टर्स या लोगों का आर्थिक स्तर तेजी से सुधारता है, जबकि दूसरे हिस्सों की स्थिति कमजोर होती जाती है। अभी तक माना जा रहा है कि इस K-शेप्ड रिकवरी का ऊपरी हिस्सा यानी अधिक आय वाला कंज्यूमर्स वर्ग सुस्ती से अछूता है। लेकिन अब सौरभ मुखर्जी का कहना है कि इस सेगमेंट में भी दबाव के संकेत दिखने लगे हैं

Moneycontrol Newsअपडेटेड Nov 01, 2024 पर 2:49 PM
देश के K-शेप्ड रिकवरी का ऊपरी हिस्सा भी पड़ रहा है धीमा, इस दिग्गज एक्सपर्ट ने जताई चिंता
Saurabh Mukherjea ने अपने पोर्टफोलियो में गोदरेज एग्रोवेट और टाटा कंज्यूमर को जोड़ा है

देश में K-शेप्ड रिकवरी के ऊपरी हिस्से में भी अब सुस्ती के संकेत दिखने लगे हैं। मुख्य रूप से ऐसा फार्मल सेक्टर में नई नौकिरियों के पैदा नहीं होने के चलते हो रहा है। जाने-माने इनवेस्टमेंट एक्सपर्ट और मार्सेलस इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के फाउंडर, सौरभ मुखर्जी (Saurabh Mukherjea) ने मनीकंट्रोल के साथ बातचीत में ये बातें कहीं। K-शेप्ड रिकवरी एक ऐसी स्थिति को दिखाता है जिसमें कुछ सेक्टर्स या लोगों का आर्थिक स्तर तेजी से सुधारता है, जबकि दूसरे हिस्सों की स्थिति कमजोर होती जाती है। अभी तक माना जा रहा है कि इस K-शेप्ड रिकवरी का ऊपरी हिस्सा यानी अधिक आय वाला कंज्यूमर्स वर्ग सुस्ती से अछूता है। लेकिन अब मुखर्जी का कहना है कि इस सेगमेंट में भी दबाव के संकेत दिखने लगे हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले तक ऐसा माना जा रहा था कि भारत की K-शेप्ड रिकवरी के ऊपरी हिस्से, यानि अधिक आय वाले सेगमेंट पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, अब इस सेगमेंट में भी दबाव के संकेत दिख रहे हैं, खासकर आईटी जैसे सर्विसेज सेक्टर में रोजगार की कमी से।

सौरभ मुखर्जी के मुताबिक, ऊपरी सेगमेंट में सुस्ती का मुख्य कारण है औपचारिक रोजगार में कमजोरी, खासकर आईटी सेक्टर में। इसके अलावा, पूरे बाजार में कंजम्प्शन घटता हुआ दिखाई दे रहा है। गाड़ियों की बिक्री में कमी और उपभोक्ता की ओर से गैर-जरूरी खर्चों में गिरावट भी इस ओर इशारा करते हैं।

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