एक्सपर्ट्स की राय अब धीमी पड़ सकती है FPI की बिकवाली,जानिए क्या है इसकी वजह

Geojit Financial Services के वी के विजयकुमार का कहना है कि मई महीने में FPI की बिकवाली जारी रही क्योंकि पूरी दुनिया के बाजार काफी कमजोर नजर आ रहे हैं

अपडेटेड May 14, 2022 पर 1:47 PM
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2022 में अब तक FPI ने भारतीय बाजारों में 1.48 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है और इसमें से भी 20,800 करोड़ रुपये की बिकवाली मई महीने के पहले 2 हफ्ते में ही हुई है।

मार्केट एनालिस्ट का कहना है कि बाजार इस समय ओवरसोल्ड हो सकता है। ऐसे में आगे आनेवाले दिनों में हमें भारतीय इक्विटी बाजारों मेंफॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) की तरफ से होनेवाली बिकवाली धीमी पड़ती नजर आ सकती है।

गौरतलब है कि 2022 में अब तक FPI ने भारतीय बाजारों में 1.48 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है और इसमें से भी 20,800 करोड़ रुपये की बिकवाली मई महीने के पहले 2 हफ्ते में ही हुई है। मई का महीना लगातार 8वां ऐसा महीना रहा है जिसमें विदेशी निवेशक नेट सेलर रहे है।

Reliance Securities के मिथुल शाह का कहना है कि आगे भी हमें भारतीय बाजारों में FPI की बिकवाली जारी रहती नजर आ सकती है लेकिन अब तक जितनी बिकवाली हो चुकी है उसे देखते हुए लगता है कि इस बिकवाली की रफ्तार थमतीं नजर आ सकती है।


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Geojit Financial Services के वी के विजयकुमार का कहना है कि मई महीने में FPI की बिकवाली जारी रही क्योंकि पूरी दुनिया के बाजार काफी कमजोर नजर आ रहे हैं। ऐसे में FPI की बिकवाली जारी रह सकती है लेकिन इसके वॉल्यूम में कमी आ सकती है।

इसी तरह HDFC Securities के दीपक जसानी का कहना है कि भारत में FPI की बिकवाली की मात्रा ग्लोबल मार्केट पर निर्भर करेगी।

इसी तरह Ventura Securities के विनीत बोलिंजर (Vinit Bolinjka) का कहना है कि FPI की सेलिंग पर यूएस बॉन्ड यील्ड का भी असर पड़ता है जो इस समय अच्छे रिटर्न दे रहे है। उन्होंने आगे कहा कि इस गिरावट के बाद भी भारतीय बाजार का वैल्यूएशन अभी भी सस्ता नहीं है। 16 गुने के लंबी अवधि के औसत के मुकाबले निफ्टी का वैल्यूएशन अभी भी ज्यादा है। जो कि निश्चित तौर पर विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक नहीं है।

विनीत बोलिंजर की रिटेल निवेशकों को सलाह है कि इस समय बाजार में बहुत आक्रामक होक खरीदारी ना करें। पूरी दुनिया में इस समय जोखिम से बचने का माहौल है। ऐसे में FPI बाजार में आनेवाले किसी भी उछाल पर बिकवाली करते नजर आएंगे।

बाजार जानकारों का कहना है कि इस समय FPI ऐसे देशों को पसंद कर रहे है जो कमोडिटी का उत्पादन करते है और वो भारत जैसे कमोडिटी का एक्सपोर्ट करने वाले देशो से दूरी बना रहे है। ऐसे में हमें सर्तक रहने की जरुरत है।

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