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यूएस फेड की तरफ से 12 महीने में 6 बार दरें बढ़ने का डर, बाजार पर पड़ेगा निगेटिव असर: Mark Matthews

चीन से कंस्ट्रक्शन से जुड़े मटेरियल में मांग में कमी और टेक्नोलॉजी में इम्प्रुमेंट के साथ ही आगे इंडस्ट्रियल मेटल कीमतों में तेजी की उम्मीद नजर नहीं आ रही है.

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 28, 2022 पर 4:41 PM
यूएस फेड की तरफ से 12 महीने में 6 बार दरें बढ़ने का डर, बाजार पर पड़ेगा निगेटिव असर: Mark Matthews
इस समय तमाम अच्छी क्वालिटी की स्मॉलकैप कंपनियां ओवरसोल्ड नजर आ रही हैं। ऐसे में अच्छी तरह से रिसर्च करके और अच्छे शेयरों की पहचान करके पैसे लगाने की सलाह होगी.

Julius Baer के रिसर्च हेड एशिया मार्क मैथ्यूज (Mark Matthews) ने मनीकंट्रोल के साथ एक खास इंटरव्यू में कहा कि वो इस बात को लेकर काफी अच्छा महसूस कर रहे हैं कि कोविड अब पेनडेमिक की जगह इनडेमिक का रूप ले रहा है। इसके आगे आने वाले वैरिएंट ओमीक्रोन से कमजोर होंगे और दुनिया जल्द ही सामान्य स्थिति में लौटती नजर आएगी। गौरतलब है कि Mark Matthews 2011 से Julius Baer के साथ जुड़ें है और उनको बैंकिंग और फाइनेंस का 27 साल से ज्यादा अनुभव है।

मनीकंट्रोल से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि वो इस बात को लेकर काफी चिंतित है कि यूएस फेड अगले 12 महीनों में ब्याज दरों में 6 बार बढ़ोतरी कर सकता है। फ्यूचर मार्केट का अनुमान भी यही है । इस बातचीत में उन्होंने कहा कि दरों में इतनी ज्यादा बढ़ोतरी को इकोनॉमी और मार्केट दोनों के लिए सहन करना बहुत आसान नहीं होगा।

यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद रूस पर लगाए प्रतिबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि रूस पर लगाए गए प्रतिबंध उतने कठोर नहीं रहे हैं जितने की उम्मीद थी। जिससे बाजार ने राहत की सांस ली है।

क्या रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया रूस-यूक्रेन संकट और इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बाद अपने महंगाई और जीडीपी ग्रोथ अनुमान में बदलाव कर सकता है। इस सवाल का जबाव देते हुए मार्क मैथ्यूज (Mark Matthews)ने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि संघर्ष कितना आगे बढ़ता है और दूसरी जगह से होने वाली सप्लाई की हालत क्या होगी। अगर यह संघर्ष और गंभीर होता है और रूस से होने वाले उत्पादन में गिरावट होती है और दूसरी जगह से होने वाली सप्लाई में बढ़त नहीं होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़त होगी।

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