अमेरिका के सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने 18 सितंबर को इंटरेस्ट रेट 50 बेसिस प्वाइंट्स घटा दिया। इससे फेडरल फंड रेट 4.75-5.0 फीसदी की रेंज में आ गया है। फेड ने 2020 के बाद पहली बार इंटरेस्ट रेट में कमी की है। फेड ने इस साल दिसंबर तक इंटरेस्ट रेट में और 50 बेसिस प्वाइंट्स की कमी का संकेत दिया है। अगले साल भी इसमें 100 बेसिस प्वाइंट्स की कमी हो सकती है। सवाल है कि अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में कमी के बाद क्या आरबीआई भी इंटरेस्ट रेट घटाएगा? अगर रेट घटाता है तो कितना घटाएगा?
RBI ने अगस्त में रेपो रेट में नहीं किया था बदलाव
RBI ने 6-8 अगस्त को हुई अपनी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था। यह 6.5 फीसदी बना हुआ है। आरबीआई ने रिटेल इनफ्लेशन के लिए 4 फीसदी का टारगेट तय किया है। रिटेल इनफ्लेशन जुलाई में 3.5 फीसदी था। अगस्त में यह थोड़ा बढ़कर 3.7 फीसदी हो गया। खानेपीने की चीजीं की कीमतें बढ़ने से अगस्त में रिटेल इनफ्लेशन थोड़ा बढ़ गया। शुरुआत में मानसून की बारिश असमान रही थी, जिसका असर फूड इनफ्लेशन पर पड़ा था। लेकिन, बाद में अच्छी बारिश हुई, जिससे फूड इनफ्लेशन पर दबाव घटा है।
आरबीआई की अगली मॉनेटरी पॉलिसी अक्टूबर में आएगी
हालांकि, इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में फूड इनफ्लेशन के बढ़कर 4.4 फीसदी तक पहुंच जाने का अनुमान है। इसका असर आरबीआई की अगली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के फैसलों पर पड़ सकता है। यह बैठक 7-9 अक्टूबर के बीच होने वाली है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक हर दो महीने पर होती है। सितंबर में इनफ्लेशन के डेटा पर अगस्त के हाई बेस इफेक्ट का भी असर दिखेगा। उधर, मध्यपूर्व में राजनीतिक तनाव बढ़ने का असर भी कीमतों खासकर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। उधर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत का असर भी कीमतों पर दिख सकता है, क्योंकि ट्रंप की पॉलिसी संरक्षणवादी होती है।
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जीडीपी की ग्रोथ आरबीआई के अनुमान से कम
इंडिया की जीडीपी ग्रोथ FY25 की पहली तिमाही में घटकर 6.7 फीसदी पर आ गई। यह बीती पांच तिमाहियों में सबसे कम ग्रोथ है। FY24 की अंतिम तिमाही में यह 7.8 फीसदी थी। यह ध्यान रखने वाली बात है कि FY25 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ आरबीआई के 7.4 फीसदी के अनुमान से 40 बेसिस प्वाइंट्स कम है।
रिटेल इनफ्लेशन पर होगा केंद्रीय बैंक का फोकस
ग्रोथ में थोड़ी कमी के बावजूद आरबीआई का फोकस इनफ्लेशन को 4 फीसदी तक लाने पर बना रह सकता है। ऐसे में इस बात की उम्मीद कम है कि आरबीआई अक्टूबर की अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट में कमी करेगा। यह बताना मुश्किल है कि आरबीआई किस महीने इंटरेस्ट रेट में कमी करेगा। लेकिन, इस बात की संभावना है कि वह 50-50 बेसिस प्वाइंट्स की कमी दो बार कर सकता है।