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अप्रैल में भी विदेशी निवेशकों ने की भारी बिकवाली, पर इन सेक्टर्स पर दिखाया भरोसा; जानिए कहा आया फ्रेश पैसा

FII outflow: वित्तीय सेवाओं और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली की रफ्तार सबसे तेज है। इसके पीछे मुख्य रूप से MTM घाटे का डर है। मार्च और अप्रैल के दौरान सरकारी बॉन्ड यील्ड 7% के ऊपर बनी रही। इसके कारण बैंकों के सरकारी प्रतिभूति पोर्टफोलियो पर घाटे की संभावना बढ़ गई है

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड May 07, 2026 पर 10:19 AM
अप्रैल में भी विदेशी निवेशकों ने की भारी बिकवाली, पर इन सेक्टर्स पर दिखाया भरोसा; जानिए कहा आया फ्रेश पैसा
साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से कुल ₹2 लाख करोड़ की निकासी कर चुके हैं

FIIs Selling: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FIIs) का बिकवाली का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अप्रैल 2026 के दूसरे पखवाड़े (16-30 अप्रैल) में विदेशी निवेशकों ने फाइनेंशियल सेक्टर से ₹11700 करोड़ से अधिक के शेयर बेच दिए हैं। साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से कुल ₹2 लाख करोड़ की निकासी कर चुके हैं। वैसे भारी बिकवाली के बीच FIIs ने कुछ चुनिंदा सेक्टर्स में खरीदारी भी की है।

फाइनेंशियल सेक्टर पर क्यों है दबाव?

वित्तीय सेवाओं और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली की रफ्तार सबसे तेज है। इसके पीछे मुख्य रूप से 'मार्क-टू-मार्केट' (MTM) घाटे का डर है। मार्च और अप्रैल के दौरान सरकारी बॉन्ड यील्ड 7% के ऊपर बनी रही। इसके कारण बैंकों के सरकारी प्रतिभूति (G-Sec) पोर्टफोलियो पर घाटे की संभावना बढ़ गई है। भारतीय रिजर्व बैंक रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तरों से बचाने के लिए करेंसी मार्केट में हस्तक्षेप कर रहा है। इससे मार्केट में लिक्विडिटी कम हो रही है और वित्तीय स्थिति सख्त हो रही है।

इसके साथ ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव के कारण बैंकों के आने वाले तिमाहियों के मुनाफे पर दबाव भी दिखने की आशंका है।

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