New F&O Rules: इस कारोबारी हफ्ते से डेरिवेटिव्स मार्केट में नए नियम लागू हो गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ज्यादातर इंडेक्स के लिए वीकली एक्सपायरी (Weekly Expiry) नहीं होगी। पहले, ट्रेडर्स अलग-अलग इंडेक्स पर हफ्ते के अलग-अलग दिनों में एक्सपायरी पर फोकस करते थे, जैसे: सोमवार को Bankex, मंगलवार को Fin Nifty, बुधवार को Bank Nifty, गुरुवार को Nifty, और शुक्रवार को Sensex। लेकिन अब, नए नियमों के तहत, हफ्ते में सिर्फ 2 इंडेक्स की एक्सपायरी होगी- निफ्टी (Nifty) और सेंसेक्स (Sensex)।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन बदलावों का F&O मार्केट के ट्रेडिंग वॉल्यूम्स पर असर पड़ेगा। कुछ ट्रेडर्स का मानना है कि वॉल्यूम्स में 10 से 30% तक की गिरावट आ सकती है। इसकी दो मुख्य वजहें हैं। पहला, एल्गो ट्रेडर्स को अब नए नियमों के हिसाब से खुद को एडजस्ट करना होगा। दूसरा, बैंक निफ्टी की वीकली एक्सपायरी से पहले जो वोलैटिलिटी होती थी, वह अब महीने के आखिरी हफ्ते में शिफ्ट हो जाएगी, जिससे Nifty पर ज्यादा दबाव पड़ेगा।
Fisdom के रिसर्च हेड, नीरव कारकेरा ने कहा कि उन्हें वॉल्यूम और वोलैटिलिटी के लिहाज से इस सप्ताह में काफी बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि नए नियमों के लागू होने के साथ, हमें उम्मीद है कि इस सप्ताह वॉल्यूम में कमी आएगी और इससे वोलैटिलिटी भी काफी हद तक कम हो सकती है। करकेरा को उम्मीद है कि वॉल्यूम में 15% से 20% की कमी आएगी।
दूसरी ओर मेहता इक्विटीज के प्रशांत तापसे ने कहा कि नए F&O नियमों का ऑप्शन वॉल्यूम पर काफी असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इंडेक्स की मिनिमम कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू अब 15 लाख रुपये है, जो पहले के 5-10 लाख रुपये के रेंज से काफी ज्यादा है। इससे जिससे रिटेल निवेशकों के लिए बाजार में प्रवेश करना मुश्किल हो जाएगी। उनका अनुमान है कि वॉल्यूम्स में 20-30% की गिरावट हो सकती है।
नए F&O नियमों में जो बदलाव किए गए हैं, उसके तहत निफ्टी के लिए लॉट साइज 25 से बढ़ाकर 75 किया जा रहा है। बैंक निफ्टी का लॉट साइज 15 से बढ़कर 30 कर दिया गया है। इस बदलाव से छोटे निवेशकों को बाजार में ट्रेड करना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इसके अलावा कई और पहलू भी इस हफ्ते ट्रेडिंग के सुस्त रहने का संकेत दे रहे हैं या इसे सुस्त रखने में अपनी भूमिका निभा सकते है। इसमें RBI की मॉनिटिरी पॉलिसी कमेटी की इस हफ्ते होने वाली बैठक और अमेरिकी बाजारों में दिसंबर महीने के दौरान काफी अधिक छुट्टियां जैसी वजहें शामिल हैं। इसके अलावा जनवरी भी ट्रेडिंग के लिहाज से आमतौर पर सुस्त रहती है।
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