भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली थमने का नाम नहीं ले रही है। अप्रैल में भी यह जारी है। इस महीने के पहले दो कारोबारी सत्रों में ही FPI ने 19,837 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे हैं। इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और रुपये में लगातार गिरावट को माना जा रहा है। इससे पहले मार्च में FPI ने घरेलू शेयर बाजार में करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड सेलिंग की थी। 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे पर शेयर बाजार बंद था।
इससे पहले अक्टूबर, 2024 में FPI ने किसी एक महीने में सबसे अधिक सेलिंग की थी। उस वक्त उन्होंने 94017 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। फरवरी 2026 में FPI ने शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये डाले थे, जो 17 महीने का हाई रहा। अप्रैल के दो कारोबारी सत्रों में उन्होंने 19,837 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। NSDL के आंकड़ों के अनुसार, ताजा बिकवाली के बाद FPI साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 1.5 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जारी रहने, कच्चे तेल के दाम के फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने, रुपये में लगातार गिरावट और डॉलर की मजबूती की वजह से FPI की बिकवाली रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इसके अलावा युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसमें आगे और कमजोरी की आशंका से भी बिकवाली को बल मिल रहा है।
विजयकुमार ने यह भी कहा कि FPI की ओर से लगातार बिकवाली के कारण भारतीय बाजार के वैल्यूएशंस उचित और कुछ सेगमेंट्स में आकर्षक हो गए हैं। आगे FPI का निवेश तभी आएगा, जब युद्ध के मोर्चे पर तनाव कम होगा और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आएगी। मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल-मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक, अमेरिका में बॉन्ड पर यील्ड बढ़ने की वजह से फिक्स्ड इनकम वाले एसेट्स का आकर्षण बढ़ा है। ऐसे में निवेशक अपने निवेश को शेयरों से इतर अन्य संपत्तियों में संतुलित कर रहे हैं।’’
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