FPI की बिकवाली जारी, मई में अब तक भारतीय शेयरों से निकाले ₹27000 करोड़; क्यों बने हुए हैं सेलर?

FPI's Selling in May: आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशक फरवरी को छोड़कर इस साल अब तक सभी महीनों में सेलर रहे हैं। FPI की लगातार बिकवाली और चालू खाते के घाटे में वृद्धि से रुपये पर दबाव बना हुआ है। सेलिंग जारी रहती है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो रुपये में और कमजोरी आ सकती है

अपडेटेड May 17, 2026 पर 12:46 PM
Story continues below Advertisement
अप्रैल में FPI ने भारतीय शेयरों से 60,847 करोड़ रुपये निकाले थे।

वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली का सिलसिला जारी है। FPI ने मई में अब तक भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से 27,048 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। NSDL के आंकड़ों के अनुसार, इसके साथ ही 2026 में अब तक FPI कुल 2.2 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। 2025 में उन्होंने भारतीय शेयरों से 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाले थे।

आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशक फरवरी को छोड़कर इस साल अब तक सभी महीनों में सेलर रहे हैं। जनवरी में FPI ने 35,962 करोड़ रुपये निकाले थे। हालांकि, फरवरी में उन्होंने 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो इससे पहले के 17 माह का सबसे बड़ा मासिक निवेश था।

इसके बाद मार्च में रुख फिर बदल गया और विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। अप्रैल में भी बिकवाली जारी रही और FPI ने 60,847 करोड़ रुपये निकाले। मई में भी बिकवाली का ट्रेंड बना हुआ है।


क्या कहना है एक्सपर्ट्स का

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल-मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर अनिश्चितता, विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण उभरते बाजारों में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर रहने से विकसित बाजारों में निवेश ज्यादा आकर्षक हो गया है। इससे निवेशक सुरक्षित एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं। साथ ही वैश्विक महंगाई की दिशा और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ओर से ब्याज दरों में संभावित कटौती को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेश के फैसलों को प्रभावित कर रही है।

नए हफ्ते के लिए ये शेयर एक्सपर्ट सुदीप शाह की टॉप चॉइस, तेजी की वापसी के लिए Nifty का 23850-23900 से ऊपर टिकना जरूरी

जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि FPI की लगातार बिकवाली और चालू खाते के घाटे (कैड) में वृद्धि से रुपये पर दबाव बना हुआ है। साल की शुरुआत में रुपया डॉलर के मुकाबले 90 के स्तर पर था, लेकिन 15 मई को यह गिरकर 96.14 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। अगर FPI की ओर से सेलिंग जारी रहती है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो रुपये में और कमजोरी आ सकती है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत 109.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।