विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने सितंबर के पहले तीन सप्ताह (22 सितंबर तक) में भारतीय शेयर बाजारों से 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाले हैं। इसकी प्रमुख वजह अमेरिका में ऊंची ब्याज दर, मंदी की आशंका, कच्चे तेल की उच्च कीमतें और ओवरवैल्यूड डॉमेस्टिक स्टॉक्स हैं। इससे पहले FPI (Foreign Portfolio Investors) मार्च से अगस्त 2023 तक लगातार छह माह भारतीय शेयरों में शुद्ध लिवाल रहे थे। इस दौरान उन्होंने 1.74 लाख करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 10 साल के लिए 4.49 प्रतिशत के स्तर पर आकर्षक बनी हुई है और भारतीय शेयरों की वैल्यूएशन उच्च बनी हुई है। ऐसे में FPIs सतर्क रुख अपनाते हुए बिकवाल बने हुए हैं।
