पिछले 7 साल का फॉरेन इनवेस्टमेंट सिर्फ 7 महीनों की गिरावट में हुआ साफ

NSDL के आंकड़ों के मुताबिक 2014 से 2020 के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटीज में 2.2 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया

अपडेटेड May 25, 2022 पर 2:06 PM
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Kotak Equities का कहना है कि अगर बाजार में वर्तमान स्थिति बनी रहती है तो घरेलू निवेशकों की तरफ से पिछले 18 महीने में बाजार को उपलब्ध कराई गई लिक्विडिटी सूखती नजर आ सकती है

पिछले 8 महीनों के दौरान भारतीय इक्विटी बाजार में दिखी FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) की अभूतपूर्व निकासी के चलते भारतीय बाजार में पिछले 7 साल में FPI के जरिए हुए सारे निवेश का सफाया हो गया है। पिछले अक्टूबर से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी मार्केट में 2.5 लाख करोड़ रुपये यानी 32 अरब डॉलर की बिकवाली की है।

NSDL के आंकड़ों के मुताबिक यह भारत में विदेशी निवेशकों द्वारा होने वाली बिकवाली के दौर में से सबसे लंबा दौर रहा है। NSDL के आंकड़ों के मुताबिक 2014 से 2020 के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटीज में 2.2 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया।

विदेशी निवेशकों ने 2010 से 2020 के दौरान भारतीय बाजारों में 4.4 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था। हाल में आई बिकवाली ने इस निवेश के आधे से ज्यादा हिस्से का सफाया हो गया। भारतीय स्टॉक्स का वैल्यूएशन तुलनात्मक रुप से काफी महंगा हो जाना, पूर्वी यूरोप में जियोपॉलिटिकल तनाव , इसके कारण कच्चे तेल और कमोडिटी की बढ़ती कीमतें, पूरी दुनिया में बढ़ती महंगाई के दबाव, महंगाई के दबाव से निपटने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की वजह से ग्रोथ पर पड़ सकने वाले निगेटिव असर की संभावना कुछ ऐसे कारण रहे हैं जिनकी वजह से इमर्जिंग मार्केट से विदेशी फंडों की जोरदार निकासी देखने को मिली है और भारत भी इसका शिकार हुआ है।


भारत ही नहीं ताइवान और साउथ कोरिया जैसे देश में भी एफपीआई की तरफ से भारी निकासी देखने को मिली है। CLSA की रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में अब तक विदेशी निवेशकों ने ताइवान से 28 अरब डॉलर की निकासी की है जबकि साउथ कोरिया से विदेश निवेशकों ने 12.8 अरब डॉलर की निकासी की है।

खास बात ये है कि विदेशी निवेशकों की तरफ से भारतीय बाजार में आई अभूतपूर्व बिकवाली के चलते अक्टूबर से अब तक निफ्टी में सिर्फ 8 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है लेकिन इसी अवधि में अमेरिका, चाइना और यूरोप के तमाम बाजारों ने निफ्टी की तुलना में ज्यादा बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार के मजबूती से टिके रहने का श्रेय काफी हद तक घरेलू रिटेल निवेशकों द्वारा की गई खरीदारी और घरेलू फंडों से बाजार को मिले सपोर्ट को जाता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने भी भारतीय बाजार में दिखे इस ट्रेंड को घरेलू रिटेल निवेशकों के झटके को पचाने की क्षमता के रूप में व्यक्त किया है। बता दें कि 2021-22 में घरेलू रिटेल निवेशकों ने भारतीय बाजार में सीधे तौर पर 2.1 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। जिसकी वजह से इसी अवधि में विदेशी निवेशकों की तरफ से की गई 2.2 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की काफी हद तक भरपाई हो गई।

रिटेल निवेशकों की तरफ से आए इस पैसे के अलावा घरेलू म्यूचुअल फंडों ने भी 2021-22 में अब तक भारतीय बाजार में 1.1 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसकी वजह से विदेशी निवेशकों की तरफ से आई भारी बिकवाली से भारतीय बाजारों को कोई बड़ा झटका नहीं लगने पाया है।

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ब्रोकरेज फंड सीएलएसए इंडिया का कहना है कि ऐसा लगता है कि इस समय भारतीय बाजार में आ रहा घरेलू निवेश किसी भी बिकवाली के दबाव से निपटने के लिए सक्षम है। जिसके कारण एफआईआई के रिकॉर्ड निकासी के बाद भी भारतीय बाजार में आने वाली गिरावट सीमित रही है।

लेकिन घरेलू ब्रोकरेज फर्म Kotak Equities का कहना है कि अगर बाजार में वर्तमान स्थिति बनी रहती है तो घरेलू निवेशकों की तरफ से पिछले 18 महीने में बाजार को उपलब्ध कराई गई लिक्विडिटी सूखती नजर आ सकती है। कमजोर ट्रेलिंग रिटर्न और बढ़ती डिपॉजिट रेट आगे रिटेल निवेशकों के विश्वास को परखती नजर आ सकती है। अगर बाजार सपाट भी रहता है तो भारतीय इक्विटी बाजार का पिछले 12 महीने का रिटर्न भी निगेटिव होता नजर आता आएगा।

 

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