ब्याज दरों में बढ़ोतरी और बैंक क्रेडिट पर अंकुश लगाने के बावजूद वर्ष की दूसरी तिमाही में वैश्विक कर्ज (Global Debt) 307 लाख करोड़ डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक कर्ज में वृद्धि में संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान जैसे बाजारों का प्रमुख योगदान रहा। यह बात इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस (IIF) ने कही है। IIF एक वित्तीय सेवा व्यापार समूह है। इसने एक रिपोर्ट में कहा कि डॉलर के मामले में वैश्विक कर्ज 2023 की पहली छमाही में 10 लाख करोड़ डॉलर और पिछले दशक में 100 लाख करोड़ डॉलर बढ़ गया है। कहा गया है कि ताजा वृद्धि ने ग्लोबल डेट-टू-GDP रेशियो को लगातार दूसरी तिमाही में बढ़ाकर 336% तक कर दिया है। 2023 से पहले सात तिमाहियों से डेट रेशियो में गिरावट आ रही थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डेट रेशियो बढ़ने के पीछे धीमी वृद्धि के साथ-साथ मूल्य वृद्धि में कमी का हाथ रहा। IIF के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में डेट रेशियो में तेज गिरावट के पीछे महंगाई में अचानक वृद्धि मुख्य कारक थी। वेतन और मूल्य दबाव कम होने से उम्मीद है कि डेट टू आउटपुट रेशियो बढ़ेगा और वर्ष के अंत तक 337% को पार कर जाएगा।
वृद्धि में 80% से ज्यादा योगदान विकसित देशों का
ताजा ऋण वृद्धि में 80% से अधिक का योगदान विकसित देशों का है। इनमें अमेरिका, जापान, ब्रिटेन और फ्रांस ने सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की। उभरते बाजारों में सबसे बड़ी वृद्धि, बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से दर्ज की गई जैसे कि चीन, भारत और ब्राजील। रिपोर्ट में पाया गया कि उभरते बाजारों में हाउसहोल्ड डेट-टू-GDP अभी भी प्री-कोविड-19 लेवल्स से ऊपर है। इसका मुख्य कारण चीन, कोरिया और थाइलैंड हैं। हालांकि, मैच्योर मार्केट्स में समान अनुपात घटकर वर्ष के पहले छह महीनों में दो दशकों के निचले स्तर पर आ गया है।
आज से फेड रिजर्व की बैठक
संयुक्त राज्य अमेरिका में लंबी अवधि तक ब्याज दरें ऊंची रहने की उम्मीद है, जिससे उभरते बाजारों पर दबाव पड़ सकता है। इसकी वजह है कि आवश्यक निवेश, कम जोखिम वाले विकसित देशों में किया जा रहा है। अनुमान है कि अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व बुधवार से शुरू हो रही अपनी बैठक के अंत में दरों को जस का तस छोड़ देगा। अगर ऐसा हुआ तो यह इस बात का संकेत होगा कि आगे दरों में बढ़ोतरी हो सकती है।