Gold and silver ETFs rise : सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में 23 जनवरी को जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। इन्होंने कल हुए भारी नुकसान की भरपाई कर ली है। खास बात यह है कि आज ETFs में यह तेज़ रिकवरी ऐसे समय में हुई है जब कीमती धातुएं नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई हैं। हालांकि, ETF अभी भी अपने 52-हफ़्ते के हाई से दूर हैं। इन्होंने कल रैली से ब्रेक लेने से एक दिन पहले 52-हफ़्ते का हाई हिट किया था।
टाटा सिल्वर ETF, कल 24 फीसदी तक गिर गया था और 25.56 रुपये प्रति यूनिट के निचले स्तर पर पहुंच गया था। आज इस ETF में तेज़ रिकवरी हुई है और यह 17 फीसदी से ज़्यादा बढ़कर दिन के उच्चतम स्तर 33 रुपये प्रति यूनिट पर पहुंच गया। यह कल के इसके निचले स्तर से 29 फीसदी की बढ़ोतरी है। ग्रोव गोल्ड ETF फिलहाल सभी गोल्ड ETF में टॉप गेनर है। आज यह ETF 7 फीसदी बढ़कर 155.97 रुपये प्रति यूनिट के आसपास ट्रेड कर रहा है।
VT मार्केट के सीनियर मार्केट एनालिस्ट APAC, जस्टिन खू ने कहा कि गोल्ड और सिल्वर ETF में यह तेज़ उछाल साफ दिखाता है कि बढ़ती ग्लोबल अनिश्चितता के बीच निवेशक कितनी तेज़ी से सेफ-हेवन एसेट्स की तरफ जा रहे हैं।
क्या आपको अभी ETFs खरीदने चाहिए?
कल के क्रैश के बारे में बात करते हुए पॉल एसेट के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट और 129 वेल्थ फंड के फंड मैनेजर प्रसेनजीत पॉल ने कहा "कल जैसे गिरावट वाले दिनों में इन्वेस्टर्स को जो बात परेशान करती है,वह सोने या चांदी की कीमत में गिरावट नहीं है, बल्कि वह स्थिरता का भ्रम है जो ETF पैदा करते हैं। उन्होंने समझाया, “कीमती धातुएं वोलेटाइल एसेट हैं, ETF उन्हें स्टॉक की तरह ट्रेडेबल बनाते हैं, जिससे इन्वेस्टर्स रोज़ाना कीमतों में होने वाले बदलावों पर रिएक्ट करते हैं। असली रिस्क बिना किसी स्पष्ट एलोकेशन या मकसद के या बिना किसी सही एंट्री-एग्जिट प्लान के ETFs खरीदना है।”
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की एसोसिएट डायरेक्टर तन्वी कंचन ने कहा कि दिसंबर 2025 के आखिर और जनवरी 2026 की शुरुआत में कीमती धातुओं में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, कीमती धातुओं के फंडामेंटल्स मज़बूत हैं। इनको सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहनों और AI इंफ्रास्ट्रक्चर रिकॉर्ड इंडस्ट्रियल डिमांड से फायदा मिलेगा।
उन्होंने आगे कहा मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात को देखते हुए कीमती धातुएं पोर्टफोलियो हेज के तौर पर काफी अहम हैं। हालांकि, 2025 में इतनी ज़बरदस्त बढ़त के बाद,एक सिंगल एंट्री प्वाइंट पर सही समय पर निवेश करना बहुत मुश्किल है। ऐसे में निवेशकों को एक ही बार में सारा पैसा लगाने के बजाय,आने वाले हफ़्तों या महीनों में धीरे-धीरे खरीदारी करने की रणनीति अपनानी चाहिए। कंज़र्वेटिव निवेशकों के लिए,सिस्टमैटिक खरीदारी के ज़रिए पोर्टफोलियो का 5-10% कीमती धातुओं के ETF में लगाने से टाइमिंग का रिस्क कम होगा। साथ ही ऐसे एसेट क्लास में एक्सपोज़र बना रहेगा। इस रणनीति में जियोपॉलिटिकल वोलैटिलिटी और मॉनेटरी पॉलिसी की अनिश्चितता से फ़ायदा होता है।
जस्टिन खू ने चेतावनी के लहजे में कहा कि हालांकि मोमेंटम बरकरार है,लेकिन इतने ऊंचे लेवल से शॉर्ट-टर्म वोलैटिलिटी और प्रॉफिट-टेकिंग का रिस्क भी बढ़ जाता है। उन्होंने आगे कहा कि ETF की डिमांड से पता चलता है कि स्ट्रेटेजिक हेज के तौर पर कीमती धातुओं में निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।
सोने या चांदी में से बेहतर कौन ?
मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि चांदी की ज़बरदस्त रैली के बाद अब सोना ज़्यादा फ़ायदेमंद लग रहा है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ के हेड ऑफ़ रिसर्च कमोडिटीज़,नवनीत दमानी और कमोडिटीज़ एनालिस्ट,मानव मोदी ने कहा,"चांदी ने कम समय में ज़बरदस्त परफॉर्मेंस दी है और अब जब गोल्ड-सिल्वर रेश्यो निचले लेवल के करीब है, तो शॉर्ट टर्म के लिए सोने का रिस्क-रिवॉर्ड ज्यादा अच्छा लग रहा है। हालांकि हम दोनों मेटल्स को लेकर पॉजिटिव हैं और इंडस्ट्रियल डिमांड और टाइट फिजिकल मार्केट की वजह से चांदी में लॉन्ग-टर्म में तेज़ी जारी रहेगी, लेकिन हाल की रैली के बाद शॉर्ट टर्म में इसकी वोलैटिलिटी भी बढ़ सकती है।"
इनका कहना है कि इस फेज में सोने में ज़्यादा इन्वेस्टमेंट करने से कीमती धातुओं में इन्वेस्टेड रहते हुए उतार-चढ़ाव को मैनेज करने में मदद मिल सकती है।
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