बेयर मार्केट में गोल्ड... रिकॉर्ड हाई से 20% गिरा, क्या अब भी है बड़ी गिरावट आने का खतरा
रिकॉर्ड हाई से 20% गिरा सोना अब बेयर मार्केट में है। इतिहास बताता है कि हर बार रिकॉर्ड उछाल के बाद गोल्ड में बड़ा क्रैश आता है। मजबूत डॉलर, ऊंची ब्याज दर और महंगे तेल के बीच निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है- क्या अभी और गिरावट बाकी है?
ईरान से जुड़े संघर्ष के बाद सोने पर कई तरह का दबाव बना हुआ है।
2026 की शुरुआत में सोना काफी मजबूत तेजी के साथ चल रहा था। पिछले साल इसमें करीब 65% का रिटर्न मिला था, इसलिए बाजार में भरोसा बना हुआ था। जनवरी में सोना 5,602 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया, लेकिन इसके बाद कहानी पलट गई। अगले तीन महीनों में कीमत गिरकर 4,495 डॉलर पर आ गई। यानी करीब 20% की गिरावट, और मार्च के आखिर तक भी दबाव बना हुआ है।
2022 से शुरू हुई रैली और अब ठहराव
अगर थोड़ा पीछे जाएं, तो यह तेजी अक्टूबर 2022 से शुरू हुई थी। उस समय सोना करीब 1,500 डॉलर पर था। वहां से बढ़ते-बढ़ते जनवरी 2026 तक 5,602 डॉलर पहुंच गया, यानी करीब 275% की बड़ी छलांग। लेकिन इतनी लंबी तेजी के बाद गिरावट आना कोई नई बात नहीं है। इतिहास में भी ऐसा बार-बार हुआ है।
इतिहास क्या कहता है?
एक पुरानी कहावत है- इतिहास खुद को दोहराता नहीं, लेकिन मिलती-जुलती कहानी जरूर बनाता है। सोने के मामले में यह बात बिल्कुल फिट बैठती है। हर बड़ी तेजी के बाद इसमें बड़ी गिरावट देखी गई है।
1974 से 1976: पहली बड़ी गिरावट
1971 से 1974 के बीच सोना 353% चढ़ा, लेकिन उसके बाद 1974 से 1976 के बीच इसमें 43% की गिरावट आ गई। उस समय महंगाई कम होने लगी थी, ब्याज दरें बढ़ रही थीं, डॉलर मजबूत हो रहा था और दुनिया में तनाव भी घट रहा था।
1980 का दौर: दूसरी बड़ी गिरावट
1976 से 1980 के बीच सोना 541% तक चढ़ा, लेकिन फिर 1980 से 1982 के बीच इसमें 52% की गिरावट आई। उस समय अमेरिका में ब्याज दरें बहुत तेजी से बढ़ाई गईं। मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों ने सोने की चमक कम कर दी।
2011 के बाद: लंबी गिरावट
1999 से 2011 तक सोना 612% बढ़ा, लेकिन उसके बाद 2011 से 2015 के बीच इसमें 42% की गिरावट आई। उस समय अर्थव्यवस्था सुधर रही थी, डॉलर मजबूत हो रहा था और निवेशकों को सोना उतना जरूरी नहीं लग रहा था।
2026 में कितना और गिर सकता है सोना?
अगर इतिहास के पैटर्न को देखें, तो कई बार सोना अपने पीक से करीब 50% तक गिरा है। इसी हिसाब से 2026 में सोना 2,800 से 3,000 डॉलर के बीच भी आ सकता है। कुछ एक्सपर्ट 3,600 डॉलर को एक अहम स्तर मान रहे हैं, जहां से लंबी अवधि का ट्रेंड बदल सकता है।
अभी गिरावट क्यों जारी है?
ईरान से जुड़े संघर्ष के बाद सोने पर कई तरह का दबाव बना हुआ है। तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे डॉलर मजबूत हो रहा है और महंगाई भी बढ़ रही है। ऐसे माहौल में अमेरिकी फेड जल्दी ब्याज दरें घटाने की स्थिति में नहीं है।
जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं और डॉलर मजबूत होता है, तो सोना रखने का फायदा कम हो जाता है, क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता। यही वजह है कि इसकी कीमत नीचे आ रही है।
क्या फिर चमकेगा सोना?
फिलहाल भले ही गिरावट दिख रही हो, लेकिन लंबी अवधि की तस्वीर पूरी तरह खराब नहीं है। दुनिया में तनाव बना हुआ है, सेंट्रल बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं और आगे चलकर डॉलर कमजोर भी हो सकता है- ये सभी चीजें सोने को सपोर्ट देती हैं।
इतिहास बताता है कि सोना लंबे समय तक शांत रहता है, फिर अचानक तेजी दिखाता है, फिर गिरता है। और यह चक्र चलता रहता है।
क्या करें निवेशक ?
सोने में निवेश करते समय यह समझना जरूरी है कि यह जल्दी मुनाफा देने वाला साधन नहीं है। इसे लंबे समय के नजरिए से देखना चाहिए। आम तौर पर सलाह दी जाती है कि अपने कुल निवेश का 10-15% ही सोने में रखें, ताकि जोखिम संतुलित रहे।
जब दुनिया में हालात स्थिर होते हैं और तनाव खत्म होता है, तो सोना भी शांत हो जाता है। लेकिन जब तक अनिश्चितता बनी रहती है, तब तक इसमें उतार-चढ़ाव जारी रहते हैं।
Disclaimer:यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।