सोने में बीते कई सालों की सबसे बड़ी गिरावट के बाद उन लोगों ने खरीदारी शुरू कर दी है, जो खरीदारी के सही मौके का इंतजार कर रहे थे। इससे सोने में तीन सालों से जारी तेजी को सपोर्ट मिला है। इस साल सोना 15 फीसदी गिरा है। मध्यपूर्व में चल रही लड़ाई के बीच सोने में आई इस गिरावट से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की पहचान पर सवाल उठने लगे थे।
सोने में बिकवाली की बड़ी वजह
एक साथ शेयर, बॉन्ड्स और करेंसी में गिरावट आई। इससे निवेशकों को अपने नुकसान की भरपाई के लिए सोना बेचने पर मजबूर होना पड़ा। तुर्की भी अपनी करेंसी को सहारा देने के लिए सोना बेच रहा है। चिंता जताई जा रही है कि अगर मध्यपूर्व की लड़ाई बढ़ती है तो कई देशों के केंद्रीय बैंक भी सोना बेचना शुरू कर सकते हैं।
जनवरी के पीक से 19% गिरा सोना
सोना इस साल जनवरी के अपने सबसे हाई लेवल से 19 फीसदी गिर चुका है। यह 20 फीसदी की उस गिरावट के लेवल के करीब है, जिसे बेयर मार्केट शुरू होने का संकेत माना जाता है। लेकिन, 27 मार्च को सोने में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी देखने को मिली। इससे सोने की कीमतें 3 फीसदी तक चढ़ गईं। कुछ मनी मैनेजर्स और बैंकों का मानना है कि अभी सरकार के कर्ज और जियोपॉलिटिकल टेंशन को लेकर चिंता बनी हुई है।
सोने में निवेश का बड़ा मौका
फिडेलिटी इंटरनेशनल के मनी मैनेजर जॉर्ज एफस्टैटहोपोलक ने कहा, "मिडिल ईस्ट में टेंशन में कम होने पर सोने में यह गिरावट निवेश का बड़ा मौका है। इनफ्लेशन से जुड़े रिस्क, फिस्कल प्रेशर और बॉन्ड की विश्वसनीयता ऐसे स्ट्रक्चरल फैक्टर्स हैं, जिनसे सोने को मजबूती मिलेगी।" इस साल जनवरी के आखिर से अचानक सोने में आई गिरावट ने निवेशकों को हैरान कर दिया। सोने के साथ चांदी में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली।
2023 से सोना 150 फीसदी चढ़ा
2023 की शुरुआत से सोना अब तक 150 फीसदी चढ़ चुका है। इस तेजी में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी का बड़ा हाथ रहा। खासकर यूक्रेन पर हमले के बाद 2022 में रूस के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व के जब्त हो जाने के बाद केंद्रीय बैंकों को अपने एसेट्स डॉलर में रखने में खतरा नजर आने लगा। इसके बाद उन्होंने सोने में निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया। इससे सोने की कीमतों को पंख लग गए। उसके बाद हेज फंडों ने सोना खरीदना शुरू किया। आखिर में रिटेल इनवेस्टर्स ने भी सोना खरीदना शुरू कर दिया।
केंद्रीय बैंक सोना बेचना शुरू कर सकते हैं
एनालिस्ट्स का कहना है कि अमेरिका-ईरान की लड़ाई की वजह से केंद्रीय बैंक सोना बेचना शुरू कर सकते हैं या कम से कम इसकी खरीद में सुस्ती दिखा सकते हैं। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ सकता है। कई देश जो ज्यादा सोना खरीद रहे थे, वे एनर्जी के इंपोर्टर्स हैं। इसका मतलब है कि ऑयल और गैस की कीमतें बढ़ जाने के बाद उनके पास सोना खरीदने के लिए कम पैसे बचेंगे।
तुर्की ने 8 अरब डॉलर का गोल्ड बेचा या स्वैप किया
तुर्की ने मध्यपूर्व में लड़ाई शुरू होने के बाद दो हफ्ते में 8 अरब डॉलर से ज्यादा कीमत का गोल्ड बेचा और स्वैप किया है। उसने अपनी करेंसी लिरा को गिरने से बचाने के लिए ऐसा किया है। बैंक अक्सर करेंसी को गोल्ड से स्वैप करते हैं। हालांकि, वे बाद में दोबारा इसे खरीद लेने का वादा करते हैं। हालांकि, एक एनालिस्ट ने कहा कि गोल्ड स्वैच का सोने की कीमतों पर बहुत कम या नहीं के बराबर असर पड़ेगा।