Gold-Silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर ETFs में 6% की भारी गिरावट, इन दो कारणों से घबराए निवेशक

Gold-Silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ETFs) में गुरुवार 19 मार्च को तेज गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों का रुख बदलता नजर आया। इन दोनों वजहों से इन ETF में 6% तक की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट बताती है कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित माने जाने वाले एसेट्स में भी मुनाफावसूली कर रहे हैं

अपडेटेड Mar 19, 2026 पर 11:47 AM
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Gold-Silver ETFs: HDFC सिल्वर ETF का भाव गुरुवार को कारोबार के दौरान करीब 5.7% तक टूट गया

Gold-Silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ETFs) में गुरुवार 19 मार्च को तेज गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों का रुख बदलता नजर आया। इन दोनों वजहों से इन ETF में 6% तक की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट बताती है कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित माने जाने वाले एसेट्स में भी मुनाफावसूली कर रहे हैं।

सिल्वर ETF में सबसे ज्यादा गिरावट

सिल्वर ETF में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। HDFC सिल्वर ETF का भाव करीब 5.7% टूट गया। वहीं कोटक सिल्वर ETF में 3.5% और निपॉन इंडिया सिल्वर ETF में 4.2% की गिरावट आई। इसके अलावा ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ETF 3.5%, SBI सिल्वर ETF 3.8% और Axis सिल्वर ETF 3.7% नीचे रहे।

गोल्ड ETF भी दबाव में


गोल्ड ETF भी इस गिरावट से अछूते नहीं रहे। आदित्य बिड़ला सन लाइफ गोल्ड ETF में 3.2% की गिरावट आई। वहीं एक्सिस और DSP गोल्ड ETF भी करीब 2.5% तक फिसल गए। टाटा गोल्ड ETF में 2.9% और निपॉन इंडिया गोल्ड ETF में करीब 2.4% तक की गिरावट देखने को मिली। LIC MF गोल्ड ETF भी करीब 2.7% तक टूटकर कारोबार कर रहा था।

कमोडिटी कीमतों में कमजोरी का असर

गोल्ड ETF में आई गिरावट की बड़ी वजह गोल्ड और सिल्वर की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमजोरी रही। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी सिल्वर का मई कॉन्ट्रैक्ट करीब 2% गिरकर ₹2,43,977 प्रति किलोग्राम पर आ गया। वहीं गोल्ड का अप्रैल फ्यूचर करीब 1% गिरकर 1,51,921 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा।

फेड के फैसले से बदला सेंटीमेंट

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी मार्च बैठक में ब्याज दरों को 3.5%–3.75% के दायरे में स्थिर रखा। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने संकेत दिया कि महंगाई पर काबू पाने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है, लेकिन स्टैगफ्लेशन को लेकर चिंताएं कम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तेल की ऊंची कीमतें खर्च और रोजगार पर दबाव डाल सकती हैं, हालांकि अमेरिका में बढ़ते ऊर्जा उत्पादन से इसका कुछ असर संतुलित हो सकता है।

मिडिल ईस्ट तनाव और तेल की कीमतें

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भी बाजार की दिशा को प्रभावित किया। ईरान की ओर से कतर में एनर्जी फैसिलिटीज पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 3.44% बढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। वहीं WTI क्रूड का भाव भी 98 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इजराइल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर सीमित हमला किया है और अमेरिका को इसकी पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने कतर पर फिर हमला किया तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा।

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