अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) की रिपोर्ट आने के बाद अदाणी ग्रुप (Adani Group) के शेयर ढह गए। शेयरों के इस गिरावट के बीच GQG Partners ने 200 करोड़ डॉलर के शेयरों की खरीदारी की और सिर्फ एक महीने में अदाणी ग्रुप के शेयरों से 100 फीसदी से अधिक रिटर्न हासिल लिया है। जीक्यूजी के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) राजीव जैन उभरते बाजारों में निवेश की स्ट्रैटजी पर काम करते हैं और उन्होंने ऐसे समय में अदाणी ग्रुप पर दांव लगाकर बंपर रिटर्न पाया, जब इसके शेयर बुरी तरह टूट रहे थे। अब आगे के लिए भी उनका मानना है कि अदाणी ग्रुप के शेयर 100 फीसदी से अधिक रिटर्न दे सकते हैं। ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में राजीव जैन ने कहा कि इसके शेयर पांच साल में मल्टीबैगर (Multibagger) साबित हो सकते हैं।
GQG के राजीव जैन ने क्यों लगाया Adani Group Stocks पर दांव
जब अदाणी ग्रुप के शेयरों में बिकवाली हो रही थी तो राजीव जैन ने इसमें बड़ा निवेश इसलिए किया क्योंकि उनका मानना है कि अदाणी ग्रुप के पास अच्छे-खासे एसेट्स हैं। उदाहरण के लिए कोल माइनिंग, डेटा सेंटर्स और मुंबई एयरपोर्ट में मेजॉरिटी हिस्सेदारी, जैसे अहम एसेट्स ग्रुप के पास हैं। राजीव का कहना है कि सिर्फ एयरपोर्ट ही किसी कंपनी से ज्यादा वैल्यूएबल है।
राजीव के मुताबिक पीएम मोदी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और चीन जैसे देशों से मैनुफैक्चरिंग कंपनियों को आकर्षित करने पर काम कर रहे हैं तो इस काम में अदाणी ग्रुप काफी मददगार साबित हो सकता है। अदणी ग्रुप के कई प्रोजेक्ट्स सीधे देश के विकास लक्ष्यों से जुड़े हुए हैं और इकॉनमी के कई सेक्टर्स से हैं।
Hindenburg के आरोपों पर क्या हैं विचार
अदाणी ग्रुप के शेयरों में हिंडनबर्ग के आरोपों के चलते बिकवाली का दबाव बना। हिंडनबर्ग ने अदाणी ग्रुप की कंपनियों पर स्टॉक मैनिपुलेशन और अकाउंटिंग फ्रॉड का आरोप लगाया है। हालांकि इस पर राजीव जैन का कहना है कि इस रिपोर्ट को 10 साल पुराने न्यूजपेपर की तरह पढ़ना चाहिए। हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया है कि विदेशी खातों के जरिए अदाणी परिवार ने बाजार नियामक सेबी के नियम का उल्लंघन किया जिसके तहत लिस्टेड कंपनियों में पब्लिक शेयरहोल्डिंग कम से कम 25 फीसदी रखने का प्रावधान है। इस पर राजीव जैन ने कहा कि इसमें आरोप है कि अदाणी परिवार के पास 75 फीसदी से अधिक शेयर हैं और इसका खुलासा उचित तरीके से नहीं किया गया लेकिन क्या इसे फर्जीवाड़ा कह सकते हैं?