मार्केट रेगुलेटर सेबी की चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) और उनके पति धवल बुच ने एक बयान जारी करते हुए अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग (Hindenburg) के आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी रिसर्च और निवेश फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च सेबी की विश्वसनीयता पर हमला करने और चेयरपर्सन का चरित्र हनन करने की कोशिश कर रही है। हिंडनबर्ग ने शनिवार रात को जारी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि अदाणी ग्रुप के खिलाफ कार्रवाई करने में मार्केट रेगुलेटर सेबी ने इसलिए दिलचस्पी नहीं ली क्योंकि सेबी प्रमुख और उनके पति धवल बुच की अदाणी ग्रुप से जुड़े विदेशी फंड में हिस्सेदारी हो सकती है।
Madhabi Puri Buch और उनके पति धवल बुच ने सफाई में क्या कहा?
हिंडनबर्ग के इन आरोपों के जवाब में बुच दंपति ने रविवार शाम को जारी एक विस्तृत बयान में कहा कि IIFL वेल्थ मैनेजमेंट के एक फंड में उनका निवेश सिंगापुर स्थित प्राइवेट सिटीजन के रूप में किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि माधवी के सेबी में पूर्णकालिक सदस्य के रूप में शामिल होने से दो साल पहले यह निवेश किया गया था।
उन्होंने आगे कहा कि निवेश का निर्णय धवल के बचपन के दोस्त और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर अनिल आहूजा से प्रभावित था और 2018 में निवेश को रिडीम किया गया था और कभी भी फंड ने अदाणी ग्रुप की सिक्योरिटीज में निवेश नहीं किया था। बयान में यह भी कहा गया है कि 2019 में माधबी के सेबी अध्यक्ष बनने से पहले ब्लैकस्टोन के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में धवल की नियुक्ति सप्लाई चेन मैनेजमेंट में उनकी एक्सपर्टाइज के कारण हुई थी और ब्लैकस्टोन के रियल एस्टेट साइड से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
बयान में कहा गया, "भारत में कई तरह के नियामकीय उल्लंघनों के लिए हिंडनबर्ग को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नोटिस का जवाब देने के बजाय उसने सेबी की विश्वसनीयता पर हमला करने और सेबी चेयरपर्सन के चरित्र हनन की कोशिश करने का विकल्प चुना है।''
Hindenburg ने लगाए हैं ये आरोप
हिंडनबर्ग के अपनी ताजा रिपोर्ट जारी करने के तुरंत बाद एक बयान में बुच ने आरोपों को निराधार बताया था। हिंडनबर्ग के मुताबिक, माधवी और उनके पति ने बरमूडा और मॉरीशस में अस्पष्ट विदेशी कोषों में अघोषित निवेश किया था। उसने कहा कि ये वही फंड हैं जिनका कथित तौर पर विनोद अदाणी ने पैसों की हेराफेरी करने और अदाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। विनोद अदाणी, अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी के बड़े भाई हैं।