देश में पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश का फायदा हिताची एनर्जी इंडिया को मिल सकता है। कंपनी को इस तिमाही 5,097 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले हैं। इससे कुल ऑर्डर बुक 32,222 करोड़ रुपये की हो गई है। यह कंपनी के रेवेन्यू का करीब 4 गुना है। इससे अगले कुछ सालों तक रेवेन्यू को लेकर तस्वीर साफ है।
जून तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ 68 फीसदी
यूनियन कैबिनेट ने इस हफ्ते Green Energy Corridor Phase-III (GEC-III) को मंजूरी दी है। इसका फायदा Hitachi Energy India को मिलेगा। कंपनी का एग्जिक्यूशन भी बेहतर है। इस वजह से जून तिमाही में साल दर साल आधार पर रेवेन्यू ग्रोथ 68.6 फीसदी रही। कंपनी के रेवेन्यू में हाई वॉल्टेज डायरेक्ट करेंट (HVDC) की अच्छी हिस्सेदारी है। आने वाले महीनों में ग्रोथ को एचवीडीसी प्रोजेक्ट्स का सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
आंध्र प्रदेश में मिला पहला BESS प्रोजेक्ट
हिताची एनर्जी को आंध्र प्रदेश में पहला BESS प्रोजेक्ट मिला है। बीईएसएस का मतलब बैटरी एनर्जी सिस्टम से है। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक को रिचार्जेबल बैटरीज में स्टोर करने के लिए होता है। फिर जरूरत पड़ने पर इस एनर्जी का इस्तेमाल होता है। कंपनी के मैनेजमेंट ने इस ऑर्डर को कंपनी के लिए बड़ा मील का पत्थर बताया है। मैनेजमेंट का मानना है कि BESS कंपनी के लिए बिजनेस का नया प्लेटफॉर्म हो सकता है।
कंपनी पूरा इलेक्ट्रिकल सॉल्यूशन ऑफर करती है
Hitachi Energy India की खास बात यह है कि यह पूरा इलेक्ट्रिकल सॉल्यूशन ऑफर करती है। इसमें सिस्टम डिजाइन, ऑटोमेशन, पावर कनवर्सन सिस्टम, ग्रिड कनेक्शन और बैटरी मैनेजमेंट सॉफ्टेवयर से इंटिग्रेशन शामिल है। इसके अलावा BESS में भी बिजनेस के बड़े मोके हैं। अभी कंपनी का फोकस घरेलू बाजार पर है। लेकिन, घरेलू बाजार में टेक्नोलॉजी के कारगर रहने पर वह विदेश में धीरे-धीरे विस्तार करना चाहेगी।
रिन्यूएबल एनर्जी इंटिग्रेशन में बढ़ रहे मौके
कंपनी की ग्रोथ को डेटा सेंटर्स का बड़ा सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। इसमें GIS, ड्राई ट्रांसफॉर्मर्स और पावर ट्रांसफॉरमर्स का योगदान होगा। हिताची ने अपनी पहचान इंटिग्रेटेड 'ग्रिड-टू-रैक' सॉल्यूशन प्रोवाइडर के रूप में बनाई है। इसे कई हायरपरस्केलर से जुड़े ऑर्डर्स मिल चुके हैं। इंडिया में डेटा सेंटर्स की कपैसिटी तेजी से बढ़ रही है। कंपनी के लिए रिन्यूएबल-एनर्जी इंटिग्रेशन में भी काफी मौके हैं।
रेवेन्यू में एक्सपोर्ट्स की 26 फीसदी हिस्सेदारी
कंपनी ने वडोदरा के करजन में अपने 20वें मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पर काम शुरू कर दिया है। इसके दिसंबर 2028 में बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है। इससे कंपनी की क्षमता बढ़ेगी और सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी। कंपनी के रेवेन्यू में एक्सपोर्ट्स की हिस्सेदारी करीब 25-26 फीसदी है। जून तिमाही में कंपनी को यूरोप से एक ग्रिड-एक्सपैंशन प्रोग्राम का ऑर्डर मिला है।
करेक्शन के बाद शेयरों की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव
कंपनी का शेयर इस साल मई में 38,445 रुपये था। अभी यह 31,075 रुपये है। शेयर में FY28 की अनुमानित अर्निंग्स के 60 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। 32,222 करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक को देखते हुए यह वैल्यूएशन ज्यादा नहीं लगती है। कंपनी को आगे एचवीडीसी, रिन्यूएबल इवैक्युएशन और यूटिलिटी प्रोजेक्ट्स का सपोर्ट मिलेगा। डेटा सेंटर्स और BESS में भी कंपनी के लिए बड़े मौके हैं।