Adani Enterprises share price : अडानी एंटरप्राइजेस के शेयर शुक्रवार, 3 फरवरी को बीएसई पर शुरुआती कारोबार में 35 फीसदी से ज्यादा टूटकर 1,017.10 रुपये के स्तर पर आ गए। एक दिन पहले ही एनएसई ने शेयर को एडीशनल सर्विलांस मीजर (ASM) फ्रेमवर्क में डाल दिया था। इससे शेयर पर दबाव और बढ़ गया है। यह अडानी ग्रुप के फ्लैगशिप स्टॉक में इंट्राडे में सबसे बड़ी गिरावट है। दिसंबर, 2022 के 4,190 रुपये के रिकॉर्ड हाई से शेयर 76 फीसदी टूट चुका है। हालांकि, दोपहर 12 बजे शेयर 19.40 फीसदी कमजोरी के साथ 1,261 के आसपास कारोबार कर रहा है।
16 लाख करोड़ रुपये घटी मार्केट वैल्यू
शेयरों में भारी दबाव के चलते अडानी ग्रुप का मार्केट 10 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया, जो 24 जनवरी के बाद लगभग 50 फीसदी कम हो चुकी है। वहीं, अपने रिकॉर्ड हाई से मार्केट वैल्यू 16 लाख करोड़ रुपये कम हो चुकी है।
वहीं, पिछले दो ट्रेडिंग सेशंस में Adani Enterprises का शेयर 50 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। 24 जनवरी से अभी तक अडानी ग्रीन एनर्जी (Adani Green Energy) में 51 फीसदी, अडानी टोटल गैस (Adani Total Gas) में 58 फीसदी और अडानी ट्रांसमिशन (Adani Transmission) में 50 फीसद की गिरावट आ चुकी है।
एफएंडओ सेगमेंट में तगड़ी हलचल
एफएंडओ सेगमेंट में, कॉल और पुट राइटर्स लगातार अपनी पोजिशन कम कर रहे हैं। 1,100 और 1,200 के स्ट्राइक्स पर सबसे ज्यादा हलचल दिख रही है, वहीं इनसे ऊपर स्ट्राइक्स खत्म हो रही हैं।
24 जनवरी को हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट (Hindenburg report) जारी होने के बाद अडानी ग्रुप (Adani group) का मार्केट कैप 117 अरब डॉलर घट गया है, जो इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट है। यह अडानी ग्रुप की कुल मार्केट वैल्यू की आधी है।
अडानी ग्रुप को इन दिनों अमेरिका के शॉर्ट सेलर हिंडेनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) की तरफ से “स्टॉक मार्केट में हेराफेरी” और “अकाउंटिंग फ्रॉड” के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। हिंडेनबर्ग ने 24 जनवरी को यह रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट जारी होने के बाद अडानी ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
उधर, इकरा ने कहा, “इकरा से रेटिंग हासिल कर चुकी अडानी ग्रुप की कंपनियों को तत्काल रिफाइनेंसिंग की जरूरत नहीं है। कुछ कंपनियों को संभवतः वित्त वर्ष 25 तक इसकी जरूरत नहीं है।” एजेंसी ने कहा कि अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड (Adani Transmission Ltd) के लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट, अडानी पोर्ट्स (Adani Ports) के लिए मार्केट पर वर्चस्व वाली स्थिति और लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट और अडानी टोटल गैस (Adani Total Gas) के लिए अनुकूल हालात के चलते इन कंपनियों को लंबी अवधि में कैश फ्लो बने रहने की संभावना नजर आती है।