भारतीय शेयर बाजार 20 अप्रैल की सुबह हरे निशान में कारोबार कर रहा था। उस दौरान सेंसेक्स 407.23 अंक या 0.72 प्रतिशत बढ़कर 56,870.38 पर कारोबार कर रहा था। वहीं सुबह 10.39 बजे निफ्टी 128.60 अंक या 0.76 प्रतिशत बढ़कर 17087.30 पर कारोबार कर रहा था। सेक्टरों की बात करें तो ऑटो इंडेक्स में 2 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली। ऑटोमोबाइल शेयरों में आयशर मोटर्स, टाटा मोटर्स और मारुति सुजुकी (Eicher Motors, Tata Motors और Maruti Suzuki) में तेजी के चलते ऑटो इंडेक्स में तेजी दिखी। जबकि इन शेयरों में प्रत्येक में 2-3 प्रतिशत की वृद्धि नजर आई।
आज तेजी दिखाने वाले अन्य ऑटो स्टॉक्स में अशोक लीलैंड, भारत फोर्ज, एमआरएफ और टीवीएस मोटर कंपनी (Ashok Leyland, Bharat Forge, MRF और TVS Motor Company) शामिल हैं।
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार भारत से पैसेंजर वेहिकल (PV) का निर्यात वित्त वर्ष 2022 में 43 प्रतिशत बढ़ा। Maruti Suzuki India ने 2.3 लाख से अधिक गाड़ियां निर्यात करने के साथ इस सेगमेंट में सबसे आगे रहा।
2021-22 में PV निर्यात के रूप में 5,77,875 गाड़ियां भेजी गई। वहीं 2020-21 में 4,04,397 गाड़ियां निर्यात हुईं थी।
18 अप्रैल को देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने अपने पूरे मॉडल रेंज की कीमतों में औसतन 1.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी।
2021-22 के वित्तीय वर्ष में वैन का निर्यात बढ़कर 1,853 गाड़ियां हो गया, जो 2020-21 वित्तीय वर्ष में 1,648 गाड़ियां था। पिछले वित्त वर्ष में मारुति सुजुकी का निर्यात सबसे ज्यादा रहा। इसके बाद हुंडई मोटर इंडिया (Hyundai Motor India) और किआ इंडिया (Kia India) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहीं।
SIAM ने 20 अप्रैल को कहा कि भारत में पैसेंजर वेहिकल की थोक बिक्री मार्च में लगभग 4 प्रतिशत घटकर 2,79,501 गाडियां रह गई। मार्च 2021 में कारखानों से डीलर तक भेजे गये पैसेंजर वेहिकल (PV) की संख्या 2,90,939 थी।
SIAM के नवीनतम डेटा से पता चलता है कि मार्च 2021 में दोपहिया वाहनों की बिक्री 21 प्रतिशत गिरकर 11,84,210 इकाई रह गई।
रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार वर्ष की दूसरी छमाही में सप्लाई चैन और कमोडिटी मुद्रास्फीति में राहत मिलने से भारतीय ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री में वित्त वर्ष 2023 में 8-10 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है।
ICRA के वाइस प्रेसिडेंट Vinutaa S ने कहा "ऑटो कंपोनेंट्स में डिमांड घरेलू ओईएम, रिप्लेसमेंट और निर्यात के कारण देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2022 में घरेलू ओईएम की डिमांड दोपहिया वाहनों (2Ws) में स्लोडाउन और सेमीकंडक्टर की किल्लत के कारण प्रोडक्शन में गिरावट के चलते मिली-जुली नजर आई है।"
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