फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए Q4FY2022 एक खराब तिमाही थी। कच्चे माल की लागत में वृद्धि और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से फार्मा कंपनियों के मुनाफे में कमी देखने को मिली थी। हालांकि इन सब से बावजूद ब्रोकरेज कंपनी शेयरखान (Sharekhan) ने फार्मा शेयरों पर अपना पॉजिटिव नजरिया बनाए रखा है। उन्होंने कुछ फार्मा स्टॉक्स के नाम भी बताये जिसमें ट्रेड लिया जा सकता है।
मिंट में छपी खबर के मुताबिक Sharekhan ने जायडस लाइफसाइंसेज के शेयरों में 440 रुपये के टारगेट, सिप्ला में 1,150 रुपये, डिविस में 4,900 रुपये, ल्यूपिन में 780 रुपये के टारगेट के लिए "खरीदारी" की रेटिंग दी है। इसके अलावा सन फार्मा 1,000 रुपये, टोरेंट फार्मा 3,540 रुपये, बायोकॉन 420 रुपये, लौरस लैब्स 735 रुपये, सनोफी इंडिया 9,250 रुपये, एबट इंडिया 22,780 रुपये, स्ट्राइड्स फार्मा साइंसेज में 450 रुपये, डॉ रेड्डीज लेबोरेटरीज में 5,550 रुपये और ग्लैंड फार्मा में 3,770 रुपये के लक्ष्य के लिए खरीदारी करने की सलाह दी है।
इसके अलावा शेयरखान ने अरबिंदो पर 610 रुपये के लक्ष्य, इप्का लैब्स में 1,080 रुपये, ग्रैन्यूल्स में 290 रुपये के लक्ष्य के लिए "होल्ड" रेटिंग दी है। वहीं ब्रोकरेज ने कैपलिन प्वाइंट लेबोरेटरीज में 895 रुपये के लक्ष्य, मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर में 1,966 रुपये, एलेम्बिक फार्मास्युटिकल्स में 944 रुपये और मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज में 1,033 रुपये के लक्ष्य के लिए "पॉजिटिव" रेटिंग भी दी है।
शेयरखान ने कहा कि कच्चे माल की लागत बढ़ने, ढुलाई की दरें बढ़ने, अमेरिका में प्राइस बढ़ने के दबाव, चीन के टेंशन और अन्य वैश्विक परिस्थितियों के कारण भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए Q4FY2022 एक कमजोर तिमाही साबित हुई थी लेकिन अब फार्मा कंपनियों में आगे तेजी देखने को मिल सकती है।
शेयरखान ने कहा कि भारतीय फार्मा कंपनियां अब अवसरों का लाभ उठाने के लिए बेहतर स्थिति में हैं क्योंकि वे ये कंपनियां विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करती हैं। इसके साथ ही अधिकांश बाजारों में एक बड़ी बाजार हिस्सेदारी रखती हैं। इसके अलावा अमेरिका में लंबी अवधि के स्पेशियालिटी / जटिल जेनरिक (बायोसिमिलर सहित) और इंजेक्शन के लिए बढ़ती प्राथमिकता, आईपीएम में अपेक्षित हेल्दी ग्रोथ FY2023 में डबल डिजिट तक पहुंचने की उम्मीद है।
इसके अलावा एपीआई स्पेस में उभरते अवसर मध्यम से लंबी अवधि में प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर साबित होंगे। ब्रोकरेज ने कहा कि ये सब फैक्टर्स सामूहिक रूप से भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए लंबी अवधि में मजबूत ग्रोथ क्षमता की ओर इशारा करते हैं।
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