FMCG Stocks : महंगे तेल से “फिसलेंगे” कंज्यूमर स्टॉक्स! ये हैं जेफ्रीज के टॉप 3 पसंदीदा शेयर

रूस और यूक्रेन मिलकर गेहूं और मक्के के सबसे बड़े उत्पादक और एक्सपोर्टर हैं, पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूस से एक्सपोर्ट लगभग बंद हो गया है इसलिए इन फसलों की कीमतें आसमान छू रही हैं

अपडेटेड Mar 09, 2022 पर 2:48 PM
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कच्चे माल की आपूर्ति में कमी और ऊंची ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (transportation costs) का FMCG कंपनियों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा

FMCG Stocks : रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine war) के चलते क्रूड की कीमतें बढ़ने से कंज्यूमर स्टॉक्स खासे सुर्खियों में हैं। कई साल के हाई पर पहुंचने के बाद, 9 मार्च को भी क्रूड महंगा हुआ।

वहीं इडिबल ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी से फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) कंपनियों को सीधे तौर पर झटका लगा है, क्योंकि कंज्यूमर कंपनियां अपने साबुन के बिजनेस (soap business) के लिए पॉम ऑयल (palm oil) पर निर्भर हैं, जिसकी उनकी कुल सेल्स में 20 फीसदी हिस्सेदारी है। कच्चे माल की आपूर्ति में कमी और ऊंची ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (transportation costs) का इन कंपनियों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

जेफ्रीज के 3 पसंदीदा एफएमसीजी शेयर


कंज्यूमर स्टॉक्स का आउटलुक और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के आने वाले दिनों असर के बारे में बताते हुए ब्रोकरेज फर्म जेफ्रीज इंडिया (Jefferies India) ने FMCG कंपनियों की अर्निंग अनुमानों में गिरावट के रिस्क को लेकर आगाह किया है।

ब्रोकर कंज्यूमर कंपनियों में गॉदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Godrej Consumers), एचयूएल (HUL) और कोलगेट (Colgate) को तरजीह देती है।

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टालनी पड़ सकती है कीमतों में बढ़ोतरी

जेफ्रीज ने कहा कि महंगाई और रूरल डिमांड में सुस्ती से भारत की कंज्यूमर इंडस्ट्री को कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी टालनी पड़ सकती है।

FMCG सेक्टर को एग्री कमोडिटीज की ऊंची लागत का भी बोझ उठाना पड़ रहा है। यह स्पष्ट है कि लगभग सभी कंपनियों के मार्जिन को झटका लग सकता है।

2021 में कई बार बढ़ाई थीं कीमतें

2021 में, सेक्टर को महंगाई का दबाव सहना पड़ा था जिससे कंपनियों को लगातार तिमाहियों में कीमतें बढ़ानी पड़ी थीं। इसके चलते ग्रामीण इलाकों में डिमांड घटी थी और और शहरी बाजारों में सुस्ती देखने को मिली थी।

रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine war) ऐसे समय में शुरू हुआ है, जब सेक्टर रिवाइवल की उम्मीद कर रहा था, क्योंकि एग्री कमोडिटी की कीमतें काफी हद तक स्थिर हो रही थीं। रूस और यूक्रेन मिलकर गेहूं और मक्के के सबसे बड़े उत्पादक और एक्सपोर्टर हैं। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूस से एक्सपोर्ट लगभग बंद हो गया है, इसलिए इन फसलों की कीमतें आसमान छू रही हैं।

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