HDFC and HDFC Bank merger: HDFC के HDFC Bank में मर्जर के बाद मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalisation) के हिसाब से भारत की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी बनने का अनुमान है। एक्सचेंज को दी गई जानकारी में होम लोन देने वाली कंपनी ने बताया कि HDFC में सब्सिडियरी कंपनियों -एचडीएफसी होल्डिंग्स (HDFC Holdings) और एचडीएफसी इनवेस्टमेंट्स (HDFC Investments) को मिलाने के बाद HDFC Bank में HDFC का विलय किया जाएगा। HDFC Bank ने भी अपनी तरफ से एक्सचेंज को यही जानकारी दी है।
HDFC ने एक्सचेंज को बताया है, "प्रस्तावित डील के बाद इससे जुड़े शेयरहोल्डर्स, कस्टमर्स, कर्मचारियों सहित तमाम स्टेकहोल्डर्स के लिए दमदार वैल्यू तैयार होगी। इस विलय से दोनों कंपनियों के कारोबार, प्रोडक्ट रेंज, बैलेंसशीट और आमदनी के मौके बढ़ेंगे।"
कंपनी ने बताया कि उसके शेयरहोल्डर्स को HDFC के हर 25 शेयर के बदले में एचडीएफसी बैंक के लिए 42 शेयर मिलेंगे।
1 अप्रैल के मार्केटकैप के आधार पर, विलय के बाद मार्केट वैल्यू लगभग 12.8 लाख करोड़ रुपए होगी। HDFC ने कहा कि विलय के बाद कंपनी में उसकी 41 फीसदी हिस्सेदारी होगी।
इस घोषणा के बाद HDFC Bank का शेयर लगभग 9 फीसदी और HDFC का शेयर 10 फीसदी चढ़ गया। सुबह 11 बजे एचडीएफसी बैंक का शेयर 11 फीसदी और एचडीएफसी का शेयर 13 फीसदी मजबूती के साथ कारोबार कर रहा है।
HDFC ltd के चेयरमैन दीपक पारेख ने एक बयान में कहा, यह बराबरी का विलय है। पिछले कई साल में बैंकों और NBFC के रेगुलेशन में समानता आ गई है, जिससे इस संभावित मर्जर के लिए रास्ता साफ हुआ है।
निफ्टी50 में सबसे ज्यादा हो सकता है वेट
एनालिस्ट्स ने बताया कि मर्जर के बाद एचडीएफसी बैंक निफ्टी50 इंडेक्स (Nifty50 index) में वेट के लिहाज से सबसे बड़ा स्टॉक होगा। विलय के बाद यह रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के 11.9 फीसदी के मौजूदा वेट से आगे निकल जाएगा। 31 मार्च तक, इंडेक्स में एचडीएफसी बैंक का वेट 8.4 फीसदी, जबकि एचडीएफसी का वेट 5.66 फीसदी था।
एनालिस्ट्स का कहना है कि इस विलय से HDFC को फायदा होगा क्योंकि भारत में बैंकों के मुकाबले गैर बैंकिंग संस्थाओं के लिए फंड जुटाने की लागत बढ़ गई है। आने वाले दिनों में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में इस विलय से HDFC के लिए फंड जुटाने की लागत कम हो जाएगी।
पिछले 18 महीनों में कमजोर रहा एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक का प्रदर्शन
बाजार के कुछ जानकारों ने अनुमान जताया कि कोविड के बाद शेयर मार्केट में तेजी के बावजूद पिछले 18 महीनों के दौरान एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक के कमजोर प्रदर्शन के कारण यह कदम उठाना पड़ा है।
मर्जर से पहले, एचडीएफसी का शेयर 52 हफ्ते के निचले स्तर के आसपास था, जबकि एचडीएफसी बैंक का शेयर बीते साल महज 4 फीसदी मजबूत हुआ।