IDBI Bank stake sale : केंद्र सरकार अपने समर्थन वाले आईडीबीआई बैंक लि. की कम से कम 51 फीसदी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है। सूत्रों ने कहा, सरकार और एलआईसी (LIC) से जुड़े अधिकारी हिस्सेदारी बेचनी की योजना पर बातचीत कर रहे हैं। सरकार और एलआईसी दोनों की मिलाकर बैंक में 94 फीसदी हिस्सेदारी है। दोनों ही पक्ष हिस्सेदारी बेचने के बाद भी अपने पास कुछ हिस्सेदारी बरकरार रख सकते हैं।
मंत्रियों का एक पैनल लेगा अंतिम फैसला
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने कहा कि मंत्रियों का एक पैनल डील के स्ट्रक्चर पर अंतिम फैसला करेगा। सरकार और LIC सितंबर के अंत तक खरीदारों की दिलचस्पी का आकलन करेंगे। उधर, बुधवार, 24 अगस्त को आईडीबीआई बैंक का शेयर बीएसई पर इंट्राडे में लगभग 5 फीसदी मजबूत होकर 41 रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जो दोपहर 2.15 बजे 3 फीसदी मजबूत होकर 40.15 रुपये के स्तर पर है।
12 महीने में 8 फीसदी चढ़ा शेयर
पिछले 12 महीनों में शेयर लगभग 8 फीसदी मजबूत हो चुका है। इस प्रकार लेंडर की मार्केट वैल्यू 42,500 करोड़ रुपये के आसपास है।
इस खबर पर वित्त मंत्रालय और IDBI Bank के प्रतिनिधियों ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं LIC की तरफ से भी अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
मैनेजमेंट कंट्रोल सौंप सकती है सरकार
फिलहाल, सरकार की आईडीबीआई बैंक में अपनी और एलआईसी की कम से कम कुछ हिस्सेदारी बेचने और मैनेजमेंट कंट्रोल सौंपने की योजना है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, रिजर्व बैंक (RBI) इनवेस्टर्स को 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दे देगा। रेगुलेटर द्वारा संचालित एंटिटीज को थ्रेसहोल्ड से ऊपर हिस्सेदारी खरीदने के लिए अनुमति लेनी होती है, वहीं नॉन रेगुलेटेड कंपनियों के लिए 10 से 15 फीसदी की खरीद की सीमा है।
इस क्राइटीरिया में छूट से संभावित खरीदारों की संख्या बढ़ सकती है और सरकार की निजीकरण की योजना को रफ्तार मिल सकती है।