ऑटो सेक्टर की कहानी बड़ी पुरानी है। इसी तरह भारतीय ऑटो इंडस्ट्री भी काफी पुरानी है। सबसे पहले 1942 में हिन्दुस्तान मोटर शुरू हुई थी। इसके बाद 1944 में प्रीमियर मोटर की बुनियाद पड़ी थी। वहीं आजादी के बाद ऑटो पॉलिसी से इंडस्ट्री का ग्रोथ रुका पड़ा था। लेकिन पब्लिक सेक्टर में कार बनाने की शुरुआत 1982 में देखने को मिली। उस समय लोगों ने पब्लिक सेक्टर में कार बनाने के मकसद पर सवाल उठाये थे। सन 1982 में मारुति शुरू होकर आज देश की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी है। जानिये कैसा रहा मारुति का सफर-
बस यूं ही शुरू हुआ सफर और मंजिल मिल गई
भारत की स्वतंत्रता के अमृत महोत्सवी वर्ष के मौके पर मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर सी भार्गव ने सीएनबीसी-आवाज़ से बातचीत करते हुए कई दिलचस्प बातें बताई। उन्होंने कहा कि 1982 में मारुति की शुरुआत किसी प्लान के तहत नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि संजय गांधी देश में छोटी कार बनाना चाहते थे। लेकिन प्लेन दुर्घटना में संजय गांधी की मौत हो गई। वहीं संजय गांधी के साथ दुर्घटना होने के बाद मारुति उद्योग शुरू हुआ।
जब मारुति उद्योग शुरू हो तो शुरुआत में लोगों को बस ये राजनीतिक प्रोजेक्ट लगा। शुरू में लोगों को लगा कि कंपनी 4-5 साल ही चलेगी। इतना ही नहीं पब्लिक सेक्टर में कार बनाने के मकसद पर सवाल भी उठाये गये।
ऑटो में भारत-जापान की दोस्ती ने बदली तस्वीर
मारुति के साथ जापानी कंपनी सुजुकी के आने से स्थिति बदली। ऑटो उद्योग में मारुति और सुजुकी के बीच में गजब का तालमेल बना। इसके बाद भारत-जापान के पार्टनरशिप से इंडस्ट्री की तस्वीर बदल गई।
शानदार है मारुति का सफर - अब बना रही है सालाना 20 लाख कारें
ऑटो सेक्टर में मारुति का सफर शानदार रहा उस समय किसी ने ऐसी उम्मीद नहीं की थी। शुरुआत के 10 साल में काम अच्छे से चला। सरकार, मारुति और सुजुकी में बढ़िया तालमेल बना था। हालांकि विश्वास की कमी से काम भी रुका था। लेकिन बाद में सरकारी नीति में बदलाव आया। इसके बाद सरकार ने कामकाज सुजुकी के हाथों में सौंपने का फैसला किया।
भार्गव ने बताया कि सुजुकी के जिम्मेदारी संभालने के बाद तेज ग्रोथ का दौर शुरू हुआ। कंपनी की एक्सचेंज पर लिस्टिंग हुई। आरंभ में 1 लाख कार बनाने के लक्ष्य के साथ कंपनी शुरू हुई थी। धीरे-धीरे कंपनी के प्रोडक्शन ने रफ्तार पकड़ी। अब आलम ये है कि कंपनी सालाना 20 लाख कारें बना रही है।