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1982 में मारुति की शुरुआत किसी प्लान के तहत नहीं हुई थी, शुरुआत में लोगों लगा ये महज राजनीतिक प्रोजेक्ट

मारुति उद्योग शुरुआत में लोगों को सिर्फ राजनीतिक प्रोजेक्ट लगा था और लोगों को लगता था कि ये कंपनी सिर्फ 4-5 साल ही चलेगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 11, 2022 पर 6:53 PM
1982 में मारुति की शुरुआत किसी प्लान के तहत नहीं हुई थी, शुरुआत में लोगों लगा ये महज राजनीतिक प्रोजेक्ट
मारुति के साथ जापानी कंपनी सुजुकी के हाथ मिलाने और सुजुकी के हाथों में कमान आने से उद्योग की तस्वीर बदल गई

ऑटो सेक्टर की कहानी बड़ी पुरानी है। इसी तरह भारतीय ऑटो इंडस्ट्री भी काफी पुरानी है। सबसे पहले 1942 में हिन्दुस्तान मोटर शुरू हुई थी। इसके बाद 1944 में प्रीमियर मोटर की बुनियाद पड़ी थी। वहीं आजादी के बाद ऑटो पॉलिसी से इंडस्ट्री का ग्रोथ रुका पड़ा था। लेकिन पब्लिक सेक्टर में कार बनाने की शुरुआत 1982 में देखने को मिली। उस समय लोगों ने पब्लिक सेक्टर में कार बनाने के मकसद पर सवाल उठाये थे। सन 1982 में मारुति शुरू होकर आज देश की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी है। जानिये कैसा रहा मारुति का सफर-

बस यूं ही शुरू हुआ सफर और मंजिल मिल गई

भारत की स्वतंत्रता के अमृत महोत्सवी वर्ष के मौके पर मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर सी भार्गव ने सीएनबीसी-आवाज़ से बातचीत करते हुए कई दिलचस्प बातें बताई। उन्होंने कहा कि 1982 में मारुति की शुरुआत किसी प्लान के तहत नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि संजय गांधी देश में छोटी कार बनाना चाहते थे। लेकिन प्लेन दुर्घटना में संजय गांधी की मौत हो गई। वहीं संजय गांधी के साथ दुर्घटना होने के बाद मारुति उद्योग शुरू हुआ।

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