Stock Market : HDFC मर्जर सहित इन 4 वजहों से चढ़ा बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी 2% तक मजबूत
रैली को फाइनेंशियल स्टॉक्स से तगड़ा सपोर्ट मिला है, जिसमें दो फीसदी से ज्यादा की मजबूती देखने को मिली। इसके अलावा तेल और गैस, पावर और कैपिटल गुड्स में भी लगभग 1 फीसदी की मजबूती बनी हुई है
भारतीय शेयर बाजार में 4 अप्रैल को शुरुआती कारोबार के दौरान दमदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) दोनों 2-2 फीसदी तक की तेजी रही
भारतीय शेयर बाजार में 4 अप्रैल को शुरुआती कारोबार के दौरान दमदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty-50) दोनों में 2-2 फीसदी तक की तेजी रही। दोपहर 11.50 पर सेंसेक्स 1,185 अंकों की मजबूती के साथ 60,466 पर और निफ्टी 318 अंकों की तेजी के साथ 17,888 पर कारोबार कर रहे हैं।
बाजार की इस रैली को फाइनेंशियल स्टॉक्स से तगड़ा सपोर्ट मिला है, जिसमें दो फीसदी से ज्यादा की मजबूती देखने को मिली। इसके अलावा ऑयल और गैस, पावर और कैपिटल गुड्स में भी लगभग 1-1% फीसदी की मजबूती बनी हुई है।
इन फैक्टर्स की वजह से शेयर बाजार में बनी हुई है मजबूती :
HDFC-HDFC Bank मर्जर
HDFC Bank में HDFC के मर्जर और बैंक के मार्च तिमाही में मजबूत लोन ग्रोथ के आंकड़े जारी होने से स्टॉक्स में रैली दिख रही है। HDFC Bank ने रविवार को मार्च तिमाही के आंकड़े जारी किए थे।
एचडीएफसी बैंक (HDFC BANK) ने चौथी तिमाही के लोन ग्रोथ के आंकड़े जारी किए हैं। HDFC BANK के इस अपडेट के मुताबिक, बैंक का डिपॉजिट करीब 17% बढ़ा है। इसके अलावा बैंक के लोन ग्रोथ में 21% की उछाल देखने को मिली है। इतना ही नहीं 48.2% के साथ बैंक का CASA रेशियो चौथी तिमाही के अपडेट के मुताबिक ALL TIME HIGH पर पहुंच गया है।
जिओजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वी के विजयकुमार ने कहा, “बैंकिंग सेक्टर रफ्तार पकड़ रहा है, इसलिए रैली अच्छी मानी जानी चाहिए और इसलिए आश्चर्य की बात नहीं होगी कि निफ्टी इस बार 18,000 के स्तर तक पहुंच जाए। दूसरी तरफ, निफ्टी को 17,500 और फिर 17,350 पर अच्छा सपोर्ट मिलना चाहिए।”
उन्होंने कहा, इस तेजी में सभी सेक्टरों की भागीदारी की उम्मीद है। सपोर्ट जोन को खरीदारी के मौकों के रूप में लेना चाहिए।
वैश्विक बाजारों में उछाल
Global markets : सभी एशियाई बाजार हरे निशान में हैं। हैंगसेंग 1 फीसदी और कोस्पी लगभग 0.5 फीसदी मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं,। वहीं निक्केई में मामूली तेजी बनी हुई है।
अमेरिका में मासिक जॉब रिपोर्ट से लेबर मार्केट में मजबूती के संकेत मिले हैं, जिससे अमेरिकी बाजारों दूसरी तिमाही की अच्छी शुरुआत हुई और ऐसे फेडरल रिजर्व का सख्त नीतिगत रुख बने रहने का अनुमान है।
विजयकुमार की राय में, अमेरिका नॉन फार्म पेरोल के अनुमान से कम रहने से अमेरिकी इकोनॉमी में स्लोडाउन के संकेत मिलते हैं। इससे साल ग्लोबल ग्रोथ पर दबाव बढ़ेगा, जो पहल से यूक्रेन युद्ध के चलते कमोडिटीज की कीमतों में उछाल से प्रभावित है।
तेल में 2 साल की सबसे बड़ी गिरावट
अमेरिका ने ऑयल रिजर्व से अभी तक का सबसे ज्यादा तेल रिलीज करने का ऐलान किया है और इसमें इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मेंबर्स के शामिल होने पर राजी होने से ऑयल की कीमतों में कमजोरी आई है। अमेरिका के गुरुवार को ऑयल रिलीज करने के ऐलान के बाद ब्रेंट और यूएस क्रूड बेंचमार्क्स में दो साल की सबसे ज्यादा 13 फीसदी की वीकली गिरावट आई थी।
वित्त वर्ष 2021-22 में भारत से वस्तुओं का निर्यात बढ़कर 418 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह देश के गुड्स एक्सपोर्ट का रिकॉर्ड हाई है। रविवार को जारी डाटा के मुताबिक, निर्यात को पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स, जेम्स एंड ज्वैलरी और केमिकल्स से खासा सपोर्ट मिला। 2021-22 में भारत का गुड्स ट्रेड (आयात और निर्यात) 1 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा हो गया, क्योंकि देश का आयात 610 अरब डॉलर के आल टाइम हाई पर पहुंच गया था।
विजय कुमार ने कहा, वित्त वर्ष 23 में भारत की जीडीपी ग्रोथ कम रहेगी और महंगाई ज्यादा रहेगी। आईटी, टेलिकॉम और तेल और गैस जैसे सेगमेंट स्लोडाउन और महंगाई से प्रभावित नहीं हुए हैं। उनके अच्छे फाइनेंशियल्स हैं, इसिलए निकट भविष्य में इन्हें इनवेस्टर्स का सपोर्ट मिल सकता है। बाजार की नजर अगले हफ्ते से आ हो रहे आईटी कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजों और गाइडैंस पर रहेगी। ऊंची इनपुट कॉस्ट के कारण एफएमसीजी, सीमेंट और ऑटो कंपनियों के मार्जिन पर दबाव दिख सकता है।
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