ग्लोबल स्पेशियलिटी केमिकल मार्केट में भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी 5 साल में बढ़कर हो जाएगी दोगुनी: Crisil

क्रिसिल ने कहा है कि इस वित्त वर्ष में स्पेशियलिटी केमिकल कंपनियों की घरेलू कारोबार से आनेवाली आय में 18-20 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है जबकि अगले साल इसमें 13-15 फीसदी ग्रोथ की उम्मीद है।

अपडेटेड Mar 03, 2022 पर 5:16 PM
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क्रिसिल ने कहा है कि इस वित्त वर्ष में स्पेशियलिटी केमिकल कंपनियों की घरेलू कारोबार से आनेवाली आय में 18-20 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है

क्रिसिल ने गुरुवार को जारी अपने एक रिपोर्ट में कहा है कि आगे भारतीय स्पेशियलिटी केमिकल कंपनियां चाइनीज कंपनियों को पीछे छोड़ती नजर आएगी और 2026 तक ग्लोबल मार्केट में इनकी हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2021 के 3-4 फीसदी से बढ़कर 6 फीसदी पर पहुंच जाएगी।

क्रिसिल ने कहा है कि इस वित्त वर्ष में भारतीय स्पेशियलिटी केमिकल कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ 18-20 फीसदी के बीच रहेगी। वहीं अगले वर्ष यह 14-15 फीसदी के बीच रहेगी जबकि पिछले 2 वित्त वर्ष में इन कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ सिंगल डिजिट में रहेगी। इस ग्रोथ की वजह एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी और घरेलू बाजार में आई जोरदार मांग रहेगी।

गौरतलब है कि ग्लोबल स्तर पर तमाम कंपनियां कोरोना के बाद अपनी सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए चाइना प्लस पॉलिसी पर फोकस कर रही है जिसका फायदा भारतीय कंपनियों को मिलेगा। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि स्पेशियलिटी केमिकल की मांग में मजबूती से घरेलू कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रही है। जिसके चलते अगले 2 वित्त वर्षों में कंपनियों द्वारा अपने विस्तार पर किए जा रहे पूंजी खर्च में 50 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है और यह 15,000 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच सकता है।


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बतातें चलें कि स्पेशियलिटी केमिकल एक लो वॉल्यूम और हाई वैल्यू वाला प्रोडक्ट है। तमाम कंज्यूमर कंपनियां इसका अपने कामों में इस्तेमाल करती है। भारत का स्पेशियलिटी केमिकल सेक्टर घरेलू बाजार और विदेशी बाजार दोनों से बराबर कमाई करता है।

क्रिसिल ने कहा है कि इस वित्त वर्ष में स्पेशियलिटी केमिकल कंपनियों की घरेलू कारोबार से आनेवाली आय में 18-20 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है जबकि अगले साल इसमें 13-15 फीसदी ग्रोथ की उम्मीद है। इसके अलावा इन कंपनियों के एक्सपोर्ट में भी इस वित्त वर्ष में 18-20 फीसदी और अगले वित्त वर्ष में 10-12 फीसदी की ग्रोथ की उम्मीद है।

क्रिसिल के डायरेक्टर गौतम शाही का कहना है कि हाल के दिनों में इनवार्मेंटल कॉस्ट बढ़ने और सरकारी अनुदानों में कटौती के चलते चीन लागत प्रतिस्पर्धा के मामले में पीछे होता नजर आ रहा है। इसके साथ ही कोरोना महामारी के कारण कस्टमर चीन के अलावा एक दूसरे सप्लाई लाइन को बनाने पर ही फोकस कर रहे है। जिसका फायदा भारतीय कंपनियों को मिलेगा।

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