Vedanta को राजस्थान तेल ब्लॉक के लिए मिला 10 साल का एक्सटेंशन, शेयर में क्यों आई गिरावट?

इससे पहले सरकार ऑयल ब्लाक के लिए 10 साल के विस्तार पर तो सहमत थी, लेकिन वह ब्लॉक से तेल और गैस का अधिक हिस्सा चाहती थी। इसके अलावा सरकार लागत वसूली के मुद्दे पर 5,651 करोड़ रुपये के विवाद का निपटारा भी चाहती थी

अपडेटेड Oct 28, 2022 पर 11:41 AM
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वेदांता का बाड़मेर ब्लॉक से तेल-गैस की खोज और उत्पादन करने का शुरुआती लाइसेंस 14 मई, 2020 को खत्म हो गया था
     
     
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    Vedanta Ltd : राजस्थान तेल ब्लॉक के लिए अरबपति अनिल अग्रवाल की वेदांता लिमिटेड के लाइसेंस को 10 साल तक बढ़ा दिया गया है। वेदांता ने गुरुवार, 27 अक्टूबर को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि इस विस्तार के बाद लाइसेंस 14 मई, 2030 तक मान्य है।

    उधर, वेदांता लिमिटेड के शेयर शुरुआती कारोबार में लगभग 3 फीसदी गिरावट के साथ 279.75 रुपये पर आ गए। पूर्वाह्न 11.30 बजे शेयर 1.70 फीसदी कमजोर होकर 283 रुपये के आसपास बने हुए थे।

    लाइसेंस के एक्सटेंशन पर कहां फंसा था पेंच


    बाड़मेर ब्लॉक से तेल-गैस की खोज और उत्पादन करने का शुरुआती लाइसेंस 14 मई, 2020 को खत्म हो गया था। सरकार 10 साल के लिए विस्तार पर तो सहमत थी, लेकिन वह ब्लॉक से तेल और गैस का अधिक हिस्सा चाहती थी।

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    इसके अलावा सरकार कंपनी के साथ लागत वसूली के मुद्दे पर 5,651 करोड़ रुपये के विवाद का निपटारा भी चाहती थी। वेदांता इनमें से किसी भी मांग से सहमत नहीं हुई और उन्हें अदालत में चुनौती दी। इस बीच, कंपनी को मासिक या दो महीनों के आधार पर विस्तार दिया गया और ताजा विस्तार 31 अक्टूबर, 2022 को खत्म होने वाला था।

    शर्तों का नहीं किया खुलासा

    कंपनी ने बताया कि सरकार अब विवाद का निपटारा करने के लिए प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (PSC) को आगे बढ़ाने पर सहमत हो गई है। वेदांता ने कहा, “भारत सरकार ने आरजे ब्लॉक के लिए प्री-एनईएलपी एक्सटेंशन पॉलिसी के तहत पीएससी के विस्तार के लिए अपनी मंजूरी 15 मई, 2020 से 10 साल के लिए दे दी है जो कुछ शर्तों के अधीन है।”

    ओएनजीसी की है 30 फीसदी हिस्सेदारी

    वेदांता लि. ने शेयर बाजार को बताया कि 15 मई, 2020 से 14 मई, 2030 तक 10 साल के लिए पीएससी विस्तार को मंजूरी दी गई है। इस ब्लॉक में ओएनजीसी (ONGC) की 30 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि वेदांता लिमिटेड की इकाई केयर्न ऑयल एंड गैस की 70 फीसदी हिस्सेदारी है।

    इसमें कहा गया कि सरकार की ज्यादा प्रॉफिट शेयर की डिमांड को चुनौती देने वाली कंपनी की याचिका अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

     

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