FMCG शेयरों में दूसरे दिन भी तगड़ा दबाव दिखाई दिया। दिग्गज कंपनियों HUL, BRITANNIA और GODREJ CONSUMER के शेयर करीब 3% फिसले। आज की गिरावट के चलते ये तीनों शेयर 52 हफ्ते के निचले स्तरों पर पहुंच गये। इस साल अब तक एफएमसीजी शेयरों में कितनी गिरावट देखने को मिली है। FMCG सेक्टर में कमजोरी की वजह क्या है। कमोडिटी की कीमतों में आये उछाल का किस कंपनी और क्या असर होता है। इस पर डालते हैं एक नजर-
एफएमसीजी बास्केट के स्टॉक्स पर नजर डालें तो इस साल यानी 2022 में केवल ITC के स्टॉक में ही 13% की तेजी देखने को मिली है बाकी सभी दिग्गज FMCG स्टॉक्स में कमजोर नजर आ रहे हैं। HUL में अब तक 16% की गिरावट, Marico में 5% की गिरावट और Dabur में 9% की गिरावट देखने को मिली है।
वहीं Jubilant Foods और Godrej Cons में सबसे ज्यादा यानी कि प्रत्येक में 29% की गिरावट देखने को मिली है जबकि Britannia और Nestle प्रत्येक में 13% की गिरावट नजर आई।
कमोडिटी कीमतें बढ़ने से मार्जिन में दबाव दिखाई दिया। गेहूं, चीनी, दूध, खाने के तेल की कीमतों में तेज उछाल नजर आया है। हाल में प्रोडक्ट कीमतें बढ़ाने के बावजूद मार्जिन गिरेंगे।
कंपनियों ने कितनी बढ़ाई कीमतें
कंपनियों द्वारा कीमतें बढ़ाये जाने का असर भी उनके शेयरों पर दिखाई दिया है। Nestle ने अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में 9-16% का इजाफा किया है। वहीं HUL ने 3-13% तक कीमतें बढ़ाई हैं। Dabur कंपनी ने अपने उत्पादों की कीमत में 5% बढ़ाई जबकि Britannia ने अपनी कीमतों में 10% का इजाफा किया है।
कमोडिटी कीमतों में उछाल का भी हुआ कीमतों पर असर
2022 में गेहूं 48% हुआ महंगा
2022 में गेहूं 48% महंगा हुआ है। वहीं प्रमुख तौर पर गेहूं का इस्तेमाल कई एफएमसीजी कंपनियों के प्रोडक्ट्स में होता है। Parle के उत्पादों में 40% गेहूं का इस्तेमाल होता है जबकि Britannia के प्रोडक्ट्स में 35% गेहूं का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा Jubilant Foods के उत्पादों में भी 40% गेहूं का इस्तेमाल होता है।
दूध के दाम बढ़ने से भी कई कंपनियों के उत्पादों पर इसका असर साफ दिखाई देता है क्योंकि कई कंपनियों द्वार दूध का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर अपने प्रोडक्ट्स बनाने के लिए किया जाता है।
दूध का इस्तेमाल Nestle के 35-40% उत्पादों में किया जाता है। वहीं Jubilant Foods में भी 40% दूध का उपयोग किया जाता है।
कई एफएमसीजी कंपनियां अपने माल को तैयार करने के लिए पाम तेल का इस्तेमाल करती हैं। इसकी कीमत बढ़ने का असर उन कंपनियों के दाम पर प्रतिबिंबित होता हुआ दिखाई देता है। एफएमसीजी सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार HUL के प्रोडक्ट्स में 60% इसका इस्तेमाल होता है। वहीं Godrej Cons के प्रोडक्ट्स में 60-70% तक पाम तेल का उपयोग किया जाता है।
दूसरी तरफ चीनी की कीमतें 10% महंगी हुई हैं और FMCG कंपनियों में 50-60% तक इसका उपयोग किया जाता है।