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भारत को अगला चीन बनने में कितना समय लगेगा? कोरोना महामारी के बाद बदली स्थिति

भारत का आर्थिक ग्रोथ की लंबे समय से चीन के साथ तुलना की जाती रही है। खासतौर से जब बात ग्लोबल वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की हो। UBS सिक्योरिटीज इंडिया की चीफ इकोनॉमिस्ट, तन्वी गुप्ता जैन का कहना है कि भारत की आर्थिक ग्रोथ से काफी आशाजनक संकेत मिलते हैं, लेकिन चीन की आर्थिक ऊंचाई तक पहुंचने का रास्ता थोड़ा जटिल और बहुस्तरीय है

Moneycontrol Newsअपडेटेड Aug 31, 2024 पर 5:11 PM
भारत को अगला चीन बनने में कितना समय लगेगा? कोरोना महामारी के बाद बदली स्थिति
India Vs China: चीन की उम्रदराज होती जनसंख्या सहित कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है

भारत का आर्थिक ग्रोथ की लंबे समय से चीन के साथ तुलना की जाती रही है। खासतौर से जब बात ग्लोबल वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की हो। UBS सिक्योरिटीज इंडिया की चीफ इकोनॉमिस्ट, तन्वी गुप्ता जैन का कहना है कि भारत की आर्थिक ग्रोथ से काफी आशाजनक संकेत मिलते हैं, लेकिन चीन की आर्थिक ऊंचाई तक पहुंचने का रास्ता थोड़ा लंबा और जटिल है। हालांकि कोरोना महामारी के बाद से, भारत और चीन की आर्थिक स्थिति में बड़ा अंतर आया है।

चीन की इकोनॉमी को उम्रदराज होती जनसंख्या सहित कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसने उसकी ग्रोथ रेट को धीमा कर दिया है। वहीं भारत की आर्थिक ग्रोथ मजबूत बनी हुई है। जैन का कहना है कि भारत की युवा श्रम शक्ति, बेहतर होते इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल स्तर पर पॉजिटिव छवि ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ के लिए एक अच्छा माहौल तैयार किया है।

हालांकि, भारत की ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में हिस्सेदारी अभी सिर्फ 3% है, जबकि चीन की 30%। जैन ने हमारे सहयोगी CNBC-TV18 को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि अगले दशक में भारत की यह हिस्सेदारी दोगुनी हो सकती है, लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम भी हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, श्रम उत्पादकता में कमी, और नियामकीय प्रक्रियाओं में देरी जैसी चुनौतियां इस प्रगति को प्रभावित कर सकती हैं।

इन चुनौतियों के बावजूद, जैन का मानना है कि भारत अपने बड़े घरेलू बाजार और सस्ती श्रम शक्ति का फायदा उठाकर मैन्युफैक्चरिंग में तेजी ला सकता है। हालांकि इसके बावजूद यह ग्रोथ चीन के जैसी नहीं होगी, खासतौर से एनर्जी और टेक्सटाइल्स वस्तुओं की मांग के मामले में।

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